देहरादून, 22 जून, 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) अब देहरादून के सौंग बांध (Song Dam Project) से 400 मेगावाट बिजली बनाने के प्रोजेक्ट पर सीधे काम शुरू कर रहा है। सिंचाई विभाग और यूजेवीएनएल के बीच इस नए पावर मॉडल को लेकर आधिकारिक सहमति बन गई है। सिंचाई विभाग अब बिजली उत्पादन का काम खुद करने के बजाय केवल बांध निर्माण और उसकी तकनीकी प्रक्रियाओं तक सीमित रहेगा।
प्रमुख सचिव (ऊर्जा एवं सिंचाई) आर. मीनाक्षी सुंदरम ने यूजेवीएनएल को तुरंत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और ऊपरी कृत्रिम झील के लिए जमीन चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। राजधानी देहरादून के लोगों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी जल संस्थान और जल निगम संभालेंगे।
उत्तराखंड शासन ने यह कदम गंगा की सहायक नदियों अलकनंदा और भिलंगना बेसिन में पर्यावरण प्रतिबंधों के चलते कई बड़ी पनबिजली परियोजनाओं के अटकने के बाद उठाया है। सरकार को ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए नए तकनीकी विकल्पों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
यह पूरा सिस्टम पंप स्टोरेज पावर प्लांट मॉडल पर काम करेगा। दिन के समय जब बाजार में बिजली की मांग और दरें बहुत कम होती हैं, तब पानी को भारी मोटर्स से ऊपर लिफ्ट करके कृत्रिम झील में भरा जाएगा। शाम और रात के वक्त जब बिजली की खपत चरम पर होती है, तब इसी पानी को टर्बाइन पर गिराकर तत्काल महंगी बिजली पैदा की जाएगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों ने इस तकनीक को राज्य की भविष्य की जरूरतों के लिए सबसे सटीक माना है। जौनसार क्षेत्र में भी इसी तकनीक पर आधारित 600 मेगावाट क्षमता वाले इच्छाड़ी पंप स्टोरेज पावर प्लांट पर यूजेवीएनएल ने समानांतर तैयारी तेज कर दी है। सौंग बांध बहुउद्देशीय परियोजना से देहरादून की बड़ी आबादी को पीने का पानी और सिंचाई की सुविधा भी एक साथ मिलेगी।









