दून हॉराइज़न, देहरादून (01 सितंबर): दून घाटी में मौसमी बीमारियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सोमवार को एक ही दिन में स्वाइन फ्लू (Swine Flu) संक्रमण के 24 नए मामले दर्ज किए गए।
इनमें 16 स्थानीय निवासी हैं, जबकि 8 मरीज आसपास के पर्वतीय जिलों से इलाज कराने पहुंचे थे। जिले में अब कुल संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 105 तक जा पहुंचा है। वर्तमान में 36 मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें विभिन्न अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रखा गया है।
डेंगू का दोहरा संकट और अस्पतालों में दबाव
शहर पर केवल एक वायरस का साया नहीं है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते ग्राफ के बीच डेंगू (Dengue) का खतरा भी लगातार बना हुआ है। बीते 24 घंटों में दो नए डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई, जिससे कुल मरीजों की तादाद 114 हो गई है।
राहत की बात यह है कि इनमें से 55 मरीज देहरादून के हैं और बाकी 59 अन्य जनपदों से रेफर होकर आए हैं। स्थिति को देखते हुए दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर के बाहर लोहे के विशेष कंटेनर में फ्लू ओपीडी शुरू कर दी गई है। पंजीकरण व्यवस्था के प्रभारी विनोद नैनवाल को ही जांच, प्राथमिक उपचार और रिपोर्टिंग समन्वय की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि सामान्य मरीजों में संक्रमण न फैले।
मौत के कारणों की अब दो स्तरों पर होगी पड़ताल
संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य महकमे ने निगरानी तंत्र कड़ा कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट मेडिकल सेंटरों और ऋषिकेश एम्स को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
किसी भी स्वाइन फ्लू पीड़ित की मौत होने पर 72 घंटे के भीतर पहला ऑडिट अस्पताल या ब्लॉक स्तरीय कमेटी करेगी। इसमें मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, फिजीशियन और माइक्रोबायोलॉजिस्ट शामिल रहेंगे। इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला सर्विलांस टीम दोबारा मामले की समीक्षा करेगी। सारा डेटा एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज करना जरूरी होगा।
छह में से सिर्फ दो मौतों का कारण बना वायरस
हाल ही में श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल में छह संदिग्ध मौतों का मामला सामने आया था। जब ऑडिट टीम ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच की, तो सामने आया कि केवल दो मौतें सीधे तौर पर स्वाइन फ्लू के कारण हुईं। इनमें पौड़ी के एक 59 वर्षीय बुजुर्ग और देहरादून की 52 वर्षीय महिला शामिल थीं। दोनों मरीज पहले से ही गंभीर असाध्य रोगों से जूझ रहे थे, जिससे संक्रमण जानलेवा साबित हुआ।
बाकी चार मरीजों की जान उनकी पुरानी गंभीर बीमारियों के चलते गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेज बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने पर घरेलू नुस्खों के बजाय सीधे निकटतम सरकारी केंद्र में जांच कराएं।
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