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देहरादून शहीद स्मारक पर राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों का अनशन दसवें दिन भी जारी

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देहरादून, 24 जून, 2026 (दून हॉराइज़न)।

जल्द विधानसभा चुनाव होने की सुगबुगाहट के बीच देहरादून में आंदोलनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। आचार संहिता लगने से पहले नियुक्तियां नहीं हुईं तो उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन शुरू करेगा। शासन और प्रशासन के उदासीन रवैये को लेकर आंदोलनकारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

राज्य सरकार ने दो साल पहले इस संबंध में बाकायदा एक्ट पास कर दिया था। इसके बावजूद वर्ष 2011 से लंबित उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी आश्रितों की नियुक्तियों की फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। हक की लड़ाई लड़ रहे युवा नौकरी की आस में सालों से भटक रहे हैं।

राजधानी के शहीद स्मारक पर जारी विरोध प्रदर्शन और क्रमिक अनशन बुधवार को दसवें दिन में प्रवेश कर गया। मंच के संयोजक अंबुज शर्मा ने दोटूक कहा कि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक आंदोलनकारियों की कोई सुध नहीं ली गई है। अंदरूनी तौर पर विधानसभा चुनाव जल्दी कराने की चर्चाएं तेज हैं, जिससे आचार संहिता लागू होने पर इस पूरे प्रकरण में और भी लंबा विलंब हो सकता है।

आज के क्रमिक अनशन पर चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति उत्तराखंड के केंद्रीय महामंत्री नवीन नैथानी खुद मोर्चा संभालते हुए बैठे। उत्तरकाशी के बड़कोट से आए दिनेश राणा, देहरादून की सुनीता ठाकुर और विकास नगर के रामकिशन ने भी उनके साथ अनशन शुरू कर दिया है। शासन की बेरुखी से नाराज इन आंदोलनकारियों ने मांग पूरी होने तक पीछे न हटने की सौगंध खाई है।

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष विनोद असवाल ने धरना स्थल पहुंचकर इस मांग को अपना पूर्ण समर्थन घोषित किया। उनके साथ गंभीर सिंह नेगी, दीवान सिंह कार्की और विकास रावत ने सरकार से आश्रितों को तुरंत न्याय देने की मांग उठाई। प्रभात डंडरियाल भी सुबह ही धरना स्थल पर एकजुटता दिखाने पहुंच गए थे।

सावित्री पवार, दीपा देवी, पंकज रावत और सचिन सेमवाल ने भी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नियुक्तियां शीघ्र प्रदान करने के संकल्प के साथ सुरेश कुमार, बुद्धि रावत और मनोरथ ध्यानी धरना स्थल पर लगातार डटे हुए हैं।

शैलेश सेमवाल, जी आर रावत, धर्मानंद भट्ट और सुमित थापा ने भी इस मंच से अपनी आवाज बुलंद की। राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच अब आगामी उग्र रणनीति के लिए जल्द ही एक बड़ी बैठक बुलाने जा रहा है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी उन्होंने शासन-प्रशासन के सिर मढ़ी है।

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