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उत्तरकाशी में नासूर बने भूस्खलन जोन का होगा स्थाई इलाज, बरसात में बंद नहीं होगा मोरी-नैटवाड़ रूट

सीएम पुष्कर धामी ने विभिन्न विकास कार्यों के लिए ₹70 करोड़ मंजूर किए। इसमें पंतनगर विवि सड़कों और उत्तरकाशी के लैंडस्लाइड जोन के उपचार पर सबसे बड़ा जोर रहा।

देहरादून (14 अक्टूबर) : उत्तराखंड सरकार ने राज्य के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में अटके बुनियादी ढांचों को रफ्तार देने के लिए 70 करोड़ रुपये का बजट खोल दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न जनपदों में विकास योजनाओं और निर्माण कार्यों के लिए यह वित्तीय स्वीकृति दी है।

इस 70 करोड़ रुपये के पैकेज का सबसे बड़ा हिस्सा किसी सामान्य घोषणा के बजाय दो प्रमुख संकटों पर केंद्रित है-उत्तरकाशी की मोरी-नैटवाड़-जखोल सीमांत सड़क पर दशकों से नासूर बने तीन खतरनाक भूस्खलन (क्रॉनिक लैंडस्लाइड) क्षेत्रों का स्थाई उपचार और देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय ‘पंतनगर’ के बदहाल आंतरिक मार्गों का कायाकल्प। अकेले इन दोनों कार्यों पर 40 करोड़ रुपये की भारी धनराशि झोंकी गई है।

डेंजर लैंडस्लाइड जोन और पंतनगर पर बड़ा दांव

शासन से जारी आदेश के तहत उधमसिंह नगर के किच्छा विधानसभा क्षेत्र स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के जर्जर हो चुके आंतरिक मार्गों के सुधार के लिए 19.99 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं, उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र में मोरी-नैटवाड़-जखोल राज्य मार्ग संख्या-48 के किलोमीटर-09 पर हर साल यातायात ठप करने वाले क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन के उपचार के लिए 5.35 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त इसी संवेदनशील बेल्ट में दो अन्य क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन के स्थाई सुरक्षा कार्यों के लिए 14.50 करोड़ रुपये की अलग से वित्तीय स्वीकृति दी गई है। यानी करीब 20 करोड़ रुपये सीधे तौर पर पहाड़ी रास्तों को भूस्खलन-मुक्त बनाने पर खर्च होंगे, जिससे टोंस घाटी और सीमांत गांवों का संपर्क बारहमासी बना रहे।

सालों से बंद पड़ते हाईवे और जर्जर सड़कें

आपदा और बारिश के दौरान मोरी-सांकरी-जखोल मार्ग बंद होने से हरकूद, सेवा, ढाटमीर और जखोल घाटी के दर्जनों गांवों की लाइफलाइन कट जाती थी। मरीज और सेब उत्पादक किसान हफ्तों फंसे रहते थे। वहीं, पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय परिसर में देश-विदेश से आने वाले शोधार्थियों और हजारों छात्रों को गड्ढों से जूझना पड़ रहा था। सीएम धामी की घोषणाओं के तहत इन दोनों प्राथमिकताओं को पहले चरण में ही बजट आवंटन मिला है।

इसके अलावा पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट क्षेत्र में 7.740 किलोमीटर लंबे पोखरी-चंडिकाघाट मोटर मार्ग के सुधारीकरण के लिए 5.38 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट मंजूर हुआ है। देहरादून के सहसपुर स्थित झाझरा, बंशीवाला अंबेडकर पार्क से काली मंदिर, सैनिक कॉलोनी और सुद्धोवाला वार्ड 8 व 9 के आंतरिक मार्गों और नालियों के लिए 76.60 लाख रुपये मंजूर कर 45.96 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।

मैदानी और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्रों में हरिद्वार के रसूलपुर-मंगोलपुरा-आर्यनगर और लालढांग के बीच बरसात में उफनने वाली रावासन नदी पर 9.34 करोड़ रुपये से 250 मीटर लंबा स्टील ट्रस पैदल पुल बनेगा, जिससे ग्रामीणों की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी। चंपावत में मां पूर्णागिरी मेला क्षेत्र में विश्राम शेड और पुलिया निर्माण के लिए 77.22 लाख रुपये स्वीकृत कर 46.33 लाख रुपये तत्काल जारी किए गए हैं।

गदरपुर के 10 अलग-अलग ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों (जयनगर, चंडीपुर, दिनेशपुर, केशवगढ़, लालपुरी, खटोला, कुल्हा) में सामुदायिक सुविधाओं व धर्मशाला निर्माण को 2.67 करोड़ रुपये दिए गए हैं। पुलिस महकमे को मजबूत करने के लिए नरेंद्रनगर पीटीसी में भवनों के लिए 9.71 करोड़ और अल्मोड़ा के सल्ट थाने में आवासीय भवन हेतु 3.80 करोड़ रुपये (पहली किस्त 1.52 करोड़) मंजूर किए गए हैं। साथ ही ईको टास्क फोर्स की 10 नर्सरियों में आधुनिक सिंचाई तंत्र लगाने को 78.50 लाख रुपये का अनुमोदन दिया गया है।

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