रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के नेपाल भागने की आशंका के बीच एसआईटी ने दो करीबियों सतेंद्र और कल्पना पर शिकंजा कसा है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली।
देहरादून (31 अक्टूबर) : उत्तराखंड की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब उनके करीबी नेटवर्क को घेरना शुरू कर दिया है। साहू के अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर नेपाल भागने की आशंका के बीच जांच एजेंसी ने मंत्री के बयान के आधार पर दो अहम करीबियों सतेंद्र और कल्पना की तलाश तेज कर दी है। देहरादून की कैंट कोतवाली में दर्ज गंभीर आपराधिक मुकदमे और हाईकोर्ट से अग्रिम राहत न मिलने के बाद पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
नेपाल भागने की आशंका पर एसआईटी का शिकंजा
एसआईटी जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी गिरधारी लाल साहू कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नेपाल की सीमा में शरण ले सकता है। मंत्री रेखा आर्या ने पुलिस पूछताछ और औपचारिक बयान में गिरधारी के दो बेहद नजदीकी सहयोगियों—सतेंद्र और कल्पना के नाम दर्ज कराए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सतेंद्र के भी सीमा पार भागने का अंदेशा जताया जा रहा है। एसआईटी प्रभारी जया बलोनी के अनुसार, दोनों करीबियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए उनके अंतिम लोकेशन ट्रैस किए जा रहे हैं।
पहली शादी छिपाने और हत्या साजिश के आरोप
विवाद की जड़ देहरादून के कैंट कोतवाली में दर्ज वह एफआईआर है, जिसमें मंत्री ने अपने पति पर पहली शादी छिपाकर 2004 में विवाह करने, घरेलू हिंसा, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, कंपनियों में फर्जी दस्तखत कर निदेशक पद से बेदखल करने और ऑडियो टेप के जरिए हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। निचली अदालत से साहू की अग्रिम जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को निर्दोष बताते हुए सभी आरोपों को मनगढ़ंत करार दिया है और दावा किया है कि वे पिछले दो दशक से साथ रह रहे थे।
गिरफ्तारी पर रोक नहीं, हाईकोर्ट में अगली सुनवाई
उत्तराखंड हाईकोर्ट की जस्टिस आलोक मेहरा की एकल पीठ ने साहू के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष को 3 नवंबर तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय की गई है। एसआईटी का कहना है कि जब तक तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, तब तक सीमावर्ती जनपदों और संभावित ठिकानों पर दबिश जारी रहेगी ताकि मुख्य आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा सके।









