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पप्पू यादव के संसद परिसर में भगवा धारण कर प्रदर्शन पर भड़का उत्तराखंड ब्राह्मण महासंघ, बताया सनातन के खिलाफ षड्यंत्र

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देहरादून, 3 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।

बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद भवन के मकर द्वार पर भगवा वेश धारण कर किए गए प्रदर्शन को लेकर उत्तराखंड में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। देहरादून स्थित 6 सहारनपुर रोड पर आयोजित ‘उत्तराखंड ब्राह्मण समाज महासंघ’ की बैठक में इस घटना की तीखी भर्त्सना की गई। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संसद परिसर में किया गया यह स्वांग सनातन संस्कृति और पूज्य संतों की साधना को नीचा दिखाने की सोची-समझी साजिश है।

इस बैठक में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के उन सांसदों के रुख पर भी गहरा असंतोष व्यक्त किया गया, जिन्होंने इस प्रदर्शन का समर्थन किया था। महासंघ के अध्यक्ष पंडित रामप्रसाद गौतम ने स्पष्ट कहा कि विपक्षी नेता जानबूझकर संतों को चढ़ावा चोरी से जोड़ने की गलत मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रहे हैं। मामले की निष्पक्ष जांच से यह साफ हो चुका है कि गड़बड़ी में केवल कुछ कर्मचारी शामिल पाए गए थे, इसमें किसी भी संत की कोई भूमिका नहीं है।

पंडित रामप्रसाद गौतम ने विपक्षी नेताओं की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिलने के बावजूद वहां नहीं पहुंचे, वे आज धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं पर टिप्पणी कर रहे हैं। जिन नेताओं ने कभी राम मंदिर निर्माण में एक रुपये का योगदान नहीं दिया, वे केवल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए मंदिर चढ़ावे का मुद्दा उछाल रहे हैं। महासंघ ऐसे सभी सनातन विरोधी रवैये का पुरजोर विरोध करता है।

महासंघ के महासचिव डॉ. वी.डी. शर्मा ने सांसद पप्पू यादव के ट्रैक रिकॉर्ड को रेखांकित करते हुए कहा कि बिहार के इस चर्चित सांसद पर हत्या के प्रयास, रंगदारी और अवैध कब्जे जैसे 40 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। शर्मा के अनुसार, संसद के बाहर कई घंटों तक चला यह पूरा ड्रामा केवल केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की छवि को धूमिल करने की नीयत से रचा गया था।

संगठन की मजबूती और भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए महासंघ के पूर्व महासचिव शशि शर्मा ने बताया कि यह एक पंजीकृत ट्रस्ट है, जिससे वर्तमान में राज्य के आठ प्रमुख ब्राह्मण संगठन जुड़े हुए हैं। प्रदेश के अन्य ब्राह्मण घटकों को साथ लाने के लिए वार्ता जारी है। महासंघ का मुख्य ध्येय ब्राह्मण समाज के हितों की रक्षा करना है और कॉमन मिनिमम एजेंडे के तहत हर सहयोगी संस्था को पूरा समर्थन दिया जाएगा।

बैठक में सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर भी निर्णय लिए गए। महासंघ के वरिष्ठ सदस्य एस.एन. उपाध्याय ने देहरादून शहर में सनातन धर्म के महान संत तुलसीदास जी की भव्य प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इस सुझाव का बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से अनुमोदन किया। जल्द ही इस संबंध में नगर निगम के मेयर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा जाएगा।

संयुक्त मंच के भावी विस्तार को लेकर भी रणनीति तय की गई। मुख्य संयोजक महंत रविंद्रपुरी जी महाराज से महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द मुलाकात करेगा। इस वार्ता के दौरान संगठन की भावी कार्यप्रणाली और सामाजिक प्राथमिकताओं से जुड़ी कुछ व्यावहारिक शंकाओं का समाधान किया जाएगा, जिसके बाद नए संगठनों को औपचारिक रूप से जोड़ा जाएगा।

इस उच्चस्तरीय बैठक में पंडित रामप्रसाद उपाध्याय, अवनीश कांत शर्मा, राजेंद्र प्रसाद शर्मा और रूपचंद शर्मा सहित कई वरिष्ठ समाजसेवियों ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सनातन परंपराओं और संतों के सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा।

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