देहरादून, 5 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand Election Commission : मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने बुधवार को वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की कमान संभाल ली। कुमाऊं और गढ़वाल के मंडलायुक्तों के साथ सभी जिलाधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सख्त निर्देश जारी किए गए। अब 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को विसंगति वाले नोटिस के समाधान के लिए मतदान केंद्रों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
बीएलओ सीधे इन चिन्हित मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक देंगे। घर पर ही नोटिस की सुनवाई और उसका निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। इस कदम का सीधा असर उन हजारों बुजुर्गों पर पड़ेगा जो शारीरिक अक्षमता के कारण बूथ तक पहुंचने में असमर्थ रहते थे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी दिव्यांग या वरिष्ठ नागरिक को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में फॉर्म 6, 7 और 8 की वर्तमान स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोला गया। जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को सख्त लहजे में निर्देश मिले हैं कि अब तक प्राप्त सभी आवेदनों की नियमानुसार बारीकी से जांच हो। समय सीमा के भीतर इन आवेदनों का निस्तारण करना अनिवार्य है। अधिकारियों की लेटलतीफी बर्दाश्त के दायरे से बाहर है।
दावे और आपत्तियों के चरण में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक बड़ा तकनीकी पहरा लगाया गया है। अगर कोई एक मतदाता 5 से अधिक मामलों में अपनी आपत्तियां दर्ज कराता है तो मामला सीधे ईआरओ (Electoral Registration Officer) के पास जाएगा। ईआरओ स्वयं अपने स्तर पर इन दावों का विधिवत जमीनी सत्यापन करेंगे। यह प्रावधान चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
जमीनी हकीकत परखने की जिम्मेदारी मंडलायुक्तों के कंधों पर डाली गई है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत और गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप को अपने-अपने मंडलों में जिलेवार दौरा करना होगा। यह केवल सामान्य दौरा नहीं बल्कि ‘सुपर चेकिंग’ अभियान होगा। निर्वाचन कार्य में किसी भी स्तर की लापरवाही को यह सुपर चेकिंग सीधे तौर पर पकड़ लेगी।
सचिवालय स्तर पर हुई इस महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कई आला अधिकारी मौजूद रहे। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा. विजय कुमार जोगदंडे और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने पूरी कार्यवाही की निगरानी की। दोनों मंडलायुक्त और प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों ने अपने-अपने जनपदों की मौजूदा रिपोर्ट चुनाव आयोग के सामने रखी।









