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Uttarakhand Electricity Bill : जून के बाद जुलाई में भी बढ़ी दरें, ज्यादा आएगा बिजली का बिल

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देहरादून, 29 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।

उत्तराखंड में उपभोक्ताओं के घरों का जुलाई महीने का बिजली बिल फ्यूल पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट के नाम पर 20 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़कर आएगा। ऊर्जा निगम ने बाजार से खरीदी गई अतिरिक्त बिजली का पूरा वित्तीय भार सीधे जनता के कंधों पर डाल दिया है। बीपीएल श्रेणी को भी इस नए सरचार्ज से बख्शा नहीं गया है।

मुख्य अभियंता कमर्शियल एनएस बिष्ट के कार्यालय से जारी आदेश के बाद तय हुआ कि अस्थायी बिजली कनेक्शन वालों की जेब सबसे ज्यादा कटेगी और उन्हें 20 पैसे का अधिकतम सरचार्ज देना होगा। कमर्शियल कनेक्शन पर 19 पैसे और सरकारी संस्थानों के बिलों में 18 पैसे प्रति यूनिट की दर से बढ़ोतरी तय की गई है। उद्योग और मिक्स्ड लोड श्रेणी के उपभोक्ताओं पर 17-17 पैसे का चार्ज थोपा गया है।

रेलवे और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों की बिजली 16-16 पैसे प्रति यूनिट महंगी हो गई है जबकि आम घरेलू उपभोक्ताओं को अपनी जेब से 13 पैसे अतिरिक्त चुकाने हैं। थर्मल पावर प्लांट से बिजली उत्पादन में कोयले की लागत बढ़ने का सीधा खमियाजा राज्य के लोग भुगत रहे हैं। बाजार से महंगी खरीद की भरपाई अब हर महीने सीधे उपभोक्ता के अकाउंट से काटी जाएगी।

कृषि गतिविधियों के लिए 9 पैसे और निजी ट्यूबवेल चलाने वाले किसानों पर 6 पैसे का सरचार्ज लगाया गया है। सबसे निचले पायदान पर मौजूद बीपीएल उपभोक्ताओं से भी प्रति यूनिट 5 पैसे वसूले जाएंगे। ऊर्जा निगम का साफ नियम है कि बिजली खरीद की लागत कम होने पर रिबेट मिलती है और रेट अधिक होने पर सरचार्ज के रूप में वसूली होती है।

जल निगम मुख्यालय से चार अलग-अलग कंपनियों को उनके लगाए गए ऑटोमेटिक वाटर मीटर ठप पड़ने पर नोटिस जारी किए गए हैं। राजधानी सहित कई इलाकों में पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखने के लिए पेयजल एजेंसियों ने इन कंपनियों को ऑटोमेटिक मीटर इंस्टॉलेशन का टेंडर दिया था।

इन वाटर मीटरों के जरिए पानी की खपत का सटीक और रियल-टाइम डेटा सीधे विभाग के सर्वर पर पहुंचना था जिससे बिलिंग सिस्टम की पुरानी खामियां दूर होने की उम्मीद थी। ये मीटर लगने के कुछ ही समय बाद पूरी तरह से काम करना बंद कर चुके हैं। सर्वर पर पानी की खपत का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।

करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस ऑटोमेटिक डेटा सिस्टम के फेल होने पर अधिकारियों ने अब विधिक कार्रवाई की फाइल खोल दी है। संबंधित चारों कंपनियों से तय समय सीमा के भीतर सर्वर कनेक्टिविटी और खराब मीटरों की स्पष्ट रिपोर्ट मांगी गई है।

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