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Uttarakhand EV Policy: उत्तराखंड में सस्ती होंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियां, धामी सरकार लाने जा रही है नई ईवी पॉलिसी

देहरादून, 16 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल-गैस संकट के बीच उत्तराखंड सरकार ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के चलन को बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्द ही एक नई और अधिक आकर्षक ईवी पॉलिसी लागू करने जा रही है, जिसका प्रस्ताव आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैंट रोड स्थित अपने कैंप कार्यालय में बातचीत के दौरान इस आगामी नीति की रूपरेखा साझा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस नई नीति का दोहरा उद्देश्य है—पहला, वाहन खरीदारों को वित्तीय राहत देना और दूसरा, उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाले उद्योगों को बड़े पैमाने पर निवेश के लिए आकर्षित करना।

वैश्विक संकट के बीच दूरगामी रणनीति

मुख्यमंत्री धामी ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व के कारण भारत में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अभी से ठोस और दूरगामी कदम उठाना जरूरी है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) के स्रोत बेहद सीमित हैं, इसलिए वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों की बचत और उनके उपयोग को बढ़ाना ही एकमात्र रास्ता है। नई ईवी पॉलिसी इसी दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक प्रयास है।

वर्तमान से अधिक आकर्षक होंगे नए प्रावधान

उत्तराखंड में वर्तमान व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और रोड टैक्स में छूट दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई नीति में इन रियायतों को और अधिक व्यावहारिक और आकर्षक बनाया जाएगा ताकि आम जनता का रुझान पेट्रोल-डीजल गाड़ियों को छोड़कर पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ सके।

इसके साथ ही, राज्य भर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए चरणबद्ध तरीके से ई-वाहन चार्जिंग स्टेशनों का एक बड़ा नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। परिवहन और उद्योग विभाग को समन्वय बनाकर इस पूरी नीति का अंतिम ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ

सरकार का आकलन है कि सड़कों पर ईवी की संख्या बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। आम उपभोक्ताओं के लिए इन वाहनों का संचालन काफी किफायती साबित होगा, जिससे उनकी मासिक बचत बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, यदि वाहन निर्माता कंपनियां उत्तराखंड में अपनी यूनिट लगाती हैं, तो इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश पर तेल आयात का आर्थिक दबाव भी कम होगा।

सूचना विभाग में ‘नो व्हीकल डे’ लागू

इस नीतिगत बदलाव के बीच, शासकीय स्तर पर ऊर्जा बचत की शुरुआत भी कर दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद सूचना विभाग में अब प्रत्येक शनिवार को ‘नो व्हीकल डे’ मनाने का निर्णय लिया गया है। महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत शनिवार को विभाग में वाहनों के उपयोग को प्रतिबंधित किया जाएगा।

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