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Uttarakhand Monsoon 2026 : 10 दिन की देरी से उत्तराखंड पहुंचा मॉनसून, पहली ही मूसलाधार बारिश में पानी-पानी हुआ देहरादून

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देहरादून, 1 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Monsoon 2026 : महज एक घंटे की मूसलाधार बारिश ने राजधानी देहरादून के ड्रेनेज सिस्टम और नगर निगम की मॉनसून तैयारियों को पूरी तरह से धो डाला है। राजपुर रोड पर सचिवालय ग्लोब चौक से लेकर लोटस चौक तक लंबा जाम लगा रहा जहां पानी में आधे डूबे वाहन रेंगते नजर आए। ईसी रोड पर द्वारका स्टोर से नैनीज बेकरी चौक के बीच सड़क पर करीब दो फीट पानी भर गया। पैदल राहगीरों और दोपहिया चालकों का रास्तों से निकलना नामुमकिन हो गया।

रायपुर रोड स्थित चूना भट्टा पुल, सहस्रधारा क्रॉसिंग, डील कार्यालय और थानो के आसपास की सड़कें पूरी तरह तालाब बन चुकी हैं। कांवली रोड का भी बुरा हाल है।

रिस्पना और बिंदाल नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। पिछले साल 2025 की आपदा में टूटे पुश्ते और सुरक्षा दीवारें अब तक न बनने से नदी किनारे बसी बस्तियों में खौफ है। मंगलवार को तपोवन नाला, शांति विहार, वाणी विहार और दशमेश विहार के नाले अचानक उफान पर आ गए। लोग अपना घरेलू सामान समेटकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने की तैयारी करते दिखे।

उत्तराखंड में 30 जून को मॉनसून ने 12 जिलों में एक साथ दस्तक दी है। हरिद्वार में पहले दिन बादल नहीं बरसे। 2026 में मॉनसून पिछले साल (20 जून) के मुकाबले 10 दिन की देरी से राज्य में पहुंचा है।

मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर के स्पष्ट आंकड़ों के अनुसार मॉनसून की उत्तरी सीमा इस वक्त सूरत, इंदौर और बरेली से होकर सीधे दून और मंडी से गुजर रही है। पंजाब से लेकर उत्तर बंगाल की खाड़ी तक एक मजबूत मौसमी द्रोणिका बनी हुई है। 2 जुलाई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो रहा है।

मौसम विभाग ने 4 जुलाई तक देहरादून और बागेश्वर के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंहनगर और पिथौरागढ़ के लिए येलो-ऑरेंज अलर्ट है। 4 से 6 जुलाई के बीच हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा।

चंपावत में मंगलवार को सबसे ज्यादा 60 मिमी और मोहकमपुर में 56 मिमी बारिश मापी गई। कालसी में 49, मालदेवता में 36 और देहरादून में 35.5 मिमी बारिश हुई। दून का अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री और न्यूनतम 26.3 डिग्री दर्ज किया गया।

सूखे बीते जून महीने में इस बार सामान्य से 37 प्रतिशत कम बारिश हुई है। धान, मक्का और खरीफ की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई और जलस्रोतों का स्तर तेजी से नीचे गिरा है। मौसम विभाग के ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 2017 में मॉनसून ठीक 1 जुलाई को आया था। 2010 और 2012 में 5 जुलाई को मॉनसून की एंट्री हुई थी।

आज 1 जुलाई 2026 से हल्द्वानी समेत पूरे नैनीताल जनपद के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल एक महीने की लंबी ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद खुल गए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद जायसवाल ने सुबह 7:15 से दोपहर 1:00 बजे तक का समय निर्धारित किया है। सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को निशुल्क नोटबुक का वितरण किया जा रहा है। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के महासचिव मणिपुष्पक जोशी ने निजी स्कूलों में पहले दिन से रूटीन पढ़ाई शुरू होने की बात कही।

शिक्षा विभाग ने बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी खंड और उप शिक्षा अधिकारियों को 14 सूत्रीय सख्त गाइडलाइन जारी की है। जर्जर और असुरक्षित कमरों में क्लास चलाने पर पाबंदी है। जरूरत पड़ने पर पंचायत भवनों में कक्षाएं शिफ्ट की जाएंगी। 15 जुलाई तक पूरी तरह खंडहर हो चुके स्कूल भवनों को गिराने का प्रस्ताव सीईओ कार्यालय को भेजना अनिवार्य कर दिया गया है।

बरसाती नदी, नाले या गधेरे पार करने वाले छात्रों को केवल अभिभावकों की निगरानी में ही स्कूल आना होगा। पानी की टंकियों की नियमित सफाई और डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड व डायरिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए स्कूल परिसर में जलभराव रोकने के कड़े निर्देश हैं। जिन स्कूलों में ‘स्कूल आपदा प्रबंधन योजना’ नहीं है, वे इसे तुरंत तैयार कर बच्चों को मॉक ड्रिल कराएंगे।

2 जुलाई को उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों के 66 स्थानों पर राज्य स्तरीय व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन होगा। इनमें से 95 प्रतिशत स्पॉट्स बिल्कुल नए चुने गए हैं। मुख्यमंत्री खुद इस पूरी कवायद का निरीक्षण करेंगे।

नैनीताल में दो दिन से लगातार बारिश हो रही है। पर्यटकों की भीड़ बढ़ी है लेकिन स्थानीय लोगों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। मंगलवार दोपहर को ही आसमान में छाए घने काले बादलों ने सरोवर नगरी में रात जैसा अंधेरा कर दिया। सड़कों पर चल रहे वाहनों की हेडलाइट्स और नगर पालिका की स्ट्रीट लाइटें दिन में ही जलानी पड़ीं।

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