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उत्तराखंड : पहाड़ के बच्चों को मिलेंगी सुरक्षित कक्षाएं, आपदा से टूटे सरकारी स्कूलों के लिए जारी हुए 30 करोड़ रुपये

उत्तराखंड में आपदा से क्षतिग्रस्त स्कूलों के लिए 30 करोड़ जारी हुए। प्राथमिक व माध्यमिक में मरम्मत के साथ मार्च 2027 तक काम पूरा करने का सख्त आदेश है।

देहरादून (13 अक्टूबर) : उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में कुदरत के कहर से क्षतिग्रस्त हुए सरकारी स्कूलों को दोबारा संवारने के लिए राज्य सरकार ने राज्य आपदा मद से 30 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। शिक्षा विभाग ने प्राथमिक और माध्यमिक दोनों वर्गों के लिए 15-15 करोड़ रुपये का अलग-अलग आवंटन किया है। शिक्षा महानिदेशालय ने राज्य के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को सख्त हिदायत दी है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और मार्च 2027 तक सभी काम पूरे कर उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) अनिवार्य रूप से जमा कराने होंगे।

आपदा प्रभावित स्कूलों को 30 करोड़ का बजट

पहाड़ी राज्य में हर साल भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाएं सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। कई जगहों पर सिर्फ कक्षाओं की छतें या दीवारें ही नहीं गिरीं, बल्कि स्कूल परिसरों की बाउंड्री वॉल, शौचालय और खेल मैदान तक तबाह हो चुके हैं। इस नुकसान की भरपाई के लिए प्राथमिक शिक्षा मद से चमोली, पिथौरागढ़, चंपावत, उत्तरकाशी, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा जैसे आपदा संवेदी जिलों को सवा-सवा करोड़ रुपये दिए गए हैं।

वहीं हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और ऊधमसिंह नगर को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि दी गई है। माध्यमिक शिक्षा में भी इसी तर्ज पर 15 करोड़ रुपये का जिलावार विभाजन किया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर तत्काल टेंडर प्रक्रिया शुरू कर काम जमीन पर उतारा जा सके।

सैकड़ों स्कूल बंद होने के बीच बुनियादी संकट

इस बजट की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उत्तराखंड के पहाड़ी जिले पलायन और स्कूलों के बंद होने के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। विधानसभा के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीते पांच सालों में छात्रों की कमी के चलते राज्य भर में सैकड़ों स्कूलों पर ताले लटके हैं। इनमें अकेले टिहरी जिले में सबसे ज्यादा 262 स्कूल बंद हुए, जबकि पौड़ी में 120 और पिथौरागढ़ में 104 विद्यालय बंद हो चुके हैं।

इसके अलावा अल्मोड़ा में 83, नैनीताल में 49 और चमोली में 43 स्कूल बंद पाए गए। वर्तमान में संचालित 10,940 प्राथमिक स्कूलों में जो विद्यालय आपदा की मार झेल रहे हैं, वहां जर्जर भवनों के खतरे के कारण अभिभावक बच्चों को भेजने से कतराते हैं। ऐसे में भवनों की मरम्मत सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की निरंतरता से जुड़ी है।

मार्च 2027 की सख्त मियाद और जवाबदेही तय

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोंडे ने साफ किया है कि आवंटित धन के इस्तेमाल में किसी भी तरह की लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षा महानिदेशालय ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता ऐसी होनी चाहिए कि अगली मानसूनी आपदाओं में भवनों को दोबारा नुकसान न पहुंचे।

सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित कार्ययोजना के तहत मार्च 2027 तक सभी निर्माण व मरम्मत कार्य पूरे करने होंगे और खर्च का पूरा ब्योरा उपयोगिता प्रमाण पत्र के साथ शासन को भेजना होगा। प्रशासन की इस सख्ती का सीधा मकसद यह है कि सरकारी धन कागजों में उलझने के बजाय सीधे उन नौनिहालों के काम आ सके, जो जान जोखिम में डालकर टूटे-फूटे कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं।

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