डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने उत्तराखंड के 9वें राज्यपाल पद की शपथ ली। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने लोकभवन में शपथ दिलाई। जानिए पूरा ब्योरा।
देहरादून (19 अक्टूबर) : मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने उत्तराखंड के नौवें राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ले ली है। रविवार शाम देहरादून पहुंचे मनोनीत राज्यपाल के सम्मान में लोकभवन के प्रांगण में एक भव्य और गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। यहां उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उत्तराखंड पुलिस की टुकड़ी द्वारा नए राज्यपाल को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने परेड का निरीक्षण कर सलामी ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक और शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
लोकभवन आगमन पर मनोनीत राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन का भव्य स्वागत किया गया। स्वागत करने वालों में राज्यपाल के सचिव रविनाथ रामन, उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के.के. शुक्ल, सचिव प्रोटोकॉल विनोद कुमार सुमन, मंडलायुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप, आईजी विम्मी सचदेवा रामन और अपर सचिव रीना जोशी समेत कई प्रमुख प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी शामिल रहे।
शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती और यहां की जनता को नमन किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की सेवा का यह दायित्व मिलना उनके लिए अत्यंत गौरव की बात है, जिसके लिए वह केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि सनातन आस्था और भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। यह बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे चारधामों के साथ-साथ आदि कैलाश और जागेश्वर धाम जैसे पवित्र स्थलों की धरती है। इसके अलावा पर्यटन के क्षेत्र में भी यह राज्य वैश्विक पहचान रखता है।
राज्यपाल ने उत्तराखंड को वीरों की भूमि बताते हुए कहा कि यहां के हर परिवार से कोई न कोई सदस्य देश की सरहदों की रक्षा में तैनात रहता है। उन्होंने राज्य की मातृशक्ति, युवाओं और किसानों के परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि इन्हीं के बलबूते प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए कहा कि संवैधानिक मूल्यों और पद की गरिमा की रक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार व जनता के समन्वय से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं को रफ्तार देना ही उनका परम ध्येय रहेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नए राज्यपाल को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि उनके व्यापक राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक अनुभवों का सीधा लाभ उत्तराखंड को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में सरकार जनहित के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाएगी और लोकभवन व सरकार के बीच एक बेहतरीन समन्वय देखने को मिलेगा।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन के सियासी व व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनका जन्म मध्य प्रदेश के सिवनी जिले स्थित पिपरिया गांव में हुआ था। वह पेशे से आयुर्वेद और होम्योपैथी के डॉक्टर होने के साथ-साथ एक समर्पित किसान भी हैं। उनका विधायी और प्रशासनिक करियर बेहद लंबा रहा है। वे मध्य प्रदेश की बरघाट विधानसभा सीट से चार बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद साल 2003 से 2005 तक वे मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें साल 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में वे बालाघाट संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए और 2024 तक 17वीं लोकसभा के सदस्य रहे।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन की यह नियुक्ति उत्तराखंड के राजभवन (अब लोकभवन) के एक ऐतिहासिक अध्याय के समापन के बाद हुई है। उनसे पहले राज्यपाल रहे लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने राज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक राज्यपाल पद पर बने रहने का नया कीर्तिमान स्थापित किया था। उन्होंने करीब 19 साल पुराना वह रिकॉर्ड तोड़ा जो इससे पहले पूर्व राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल के नाम दर्ज था।
लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) गुरमीत सिंह ने 5 जुलाई 2026 को लोकभवन में 1,755 दिन पूरे किए थे और 6 जुलाई 2026 को वे आधिकारिक तौर पर उत्तराखंड में सबसे लंबे कार्यकाल वाले राज्यपाल बने थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व राज्यपाल के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में राज्य ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। अब जनरल गुरमीत सिंह के लंबे और ऐतिहासिक कार्यकाल के बाद डॉ. ढाल सिंह बिसेन की ताजपोशी से लोकभवन में एक नए युग की शुरुआत हुई है, जहां उनके लंबे विधायी और वित्तीय तजुर्बे से राज्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।









