Uttarakhand News : उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं दे रहे पोस्ट ग्रेजुएट रेजीडेंट डॉक्टर्स (Resident Doctors) ने कम स्टाइपेंड को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के 600 से अधिक डॉक्टर अब सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक आंदोलन की तैयारी में हैं।
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डॉक्टरों का साफ कहना है कि यदि सरकार ने पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की तर्ज पर स्टाइपेंड नहीं बढ़ाया, तो वे पूर्ण कार्य बहिष्कार यानी हड़ताल पर चले जाएंगे।
11 राज्यों की तुलना में सबसे कम भुगतान का दावा
रेजीडेंट डॉक्टरों का दावा है कि उत्तर भारत के 11 राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में पीजी डॉक्टरों को सबसे कम मानदेय मिल रहा है। दून मेडिकल कॉलेज आरडीए (Resident Doctors Association) के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत राठी, महासचिव डॉ. हिमांशु कुमार, उपाध्यक्ष डॉ. राहुल कुमार और डॉ. प्रतिमा अरोड़ा के मुताबिक, अस्पतालों में उनसे 24 से 36 घंटे तक लगातार कठिन ड्यूटी ली जाती है। इसके एवज में महज 69 से 73 हजार रुपये ग्रॉस स्टाइपेंड मिलता है, जिसमें से तमाम कटौतियों के बाद डॉक्टर के हाथ में केवल 62 से 68 हजार रुपये ही पहुंच पाते हैं।
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सोशल मीडिया पर ‘यूनाइटेड’ होकर छेड़ी मुहिम
अपनी मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए डॉक्टरों ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स (X Campaign) पर ‘उत्तराखंड रेजीडेंट डॉक्टर्स यूनाइटेड’ नाम से मोर्चा बनाया है। इसके जरिए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव, महानिदेशक और स्थानीय विधायकों को लगातार टैग कर अपनी स्थिति बताई जा रही है। साथ ही प्रदेश भर के डॉक्टरों को जोड़ने के लिए विशेष डिजिटल नेटवर्क भी तैयार किया गया है।
हड़ताल हुई तो चरमरा सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं
वर्तमान में दून मेडिकल कॉलेज में 210, हल्द्वानी में 250 और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में करीब 150 पीजी डॉक्टर तैनात हैं। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर फैकल्टी की कमी के चलते ओपीडी, इमरजेंसी और आईसीयू का बड़ा जिम्मा इन्हीं पीजी डॉक्टरों के कंधों पर रहता है। ऐसे में यदि ये डॉक्टर हड़ताल पर जाते हैं, तो आम मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा सकती है।
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मामले पर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि डॉक्टरों का ज्ञापन मिल चुका है। निदेशालय स्तर पर अन्य राज्यों के स्टाइपेंड ढांचे का अध्ययन किया जा रहा है और जल्द ही संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने डॉक्टरों से हड़ताल का रास्ता न चुनने की अपील की है।









