नैनीताल, 1 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand News : नैनीताल जिले के पेट्रोल पंपों पर आज से बिना हेलमेट पहुंचने वाले दोपहिया वाहन चालकों को एक बूंद ईंधन नहीं दिया जा रहा है। प्रशासन का ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ नियम आज सुबह से जमीन पर उतर चुका है और सभी फिलिंग स्टेशनों पर इसकी सख्ती साफ नजर आ रही है। मशीन ऑपरेटरों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि नियम टूटने पर विभागीय कार्रवाई का सीधा सामना करना पड़ेगा।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने इस नई व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश जारी किए थे जिसके बाद संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन एवं सड़क सुरक्षा) अरविंद पांडे ने कमान संभाली। उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी को पत्र भेजकर जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर बिना सुरक्षा उपकरण वालों की सप्लाई रोकने का फरमान लागू करवा दिया। हर पेट्रोल पंप के एंट्री पॉइंट पर बड़े-बड़े अक्षरों में जागरूकता बोर्ड चस्पा कर दिए गए हैं। नियम का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जा रहा है।
परिवहन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें इस नई व्यवस्था की लगातार सघन निगरानी कर रही हैं। शहर के प्रवेश मार्गों पर भी तगड़ी व्यवस्था की गई है जहां नैनीताल जनपद की सीमा में दाखिल होने वाले बाहरी वाहनों पर नजर रखी जा रही है। पर्यटकों की सहूलियत के लिए प्रमुख प्रवेश द्वारों पर टैक्सी एवं बाइक रेंटल से संबंधित प्रतिबंधों के विशाल सूचना बोर्ड स्थापित किए गए हैं।
प्रशासन की मंशा है कि बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानियों को शहर के भीतर आकर यातायात नियमों को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या असुविधा का सामना न करना पड़े। ट्रैफिक का दबाव नियंत्रित रखना और शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना प्राथमिकता है। संभागीय परिवहन अधिकारी अरविंद पांडे के कार्यालय से आई रिपोर्ट बताती है कि हाल के समय में दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में मौतों और गंभीर घायलों का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है।
विभागीय जांच और पुलिस की तफ्तीश में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि अधिकांश जानलेवा हादसों में सिर पर हेलमेट न होना ही जान जाने का मुख्य कारण बना। इन डराने वाले आंकड़ों ने प्रशासन को सख्त नाकेबंदी और कड़े कदम उठाने पर मजबूर किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नैनीताल जिला प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि इस सघन अभियान का मकसद महज लोगों पर दंडात्मक विधिक कार्रवाई करना या उन्हें परेशान करना नहीं है। आम जनता के बीच हेलमेट पहनने के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सड़क दुर्घटनाओं की दर को नीचे लाना प्रशासन का अंतिम लक्ष्य है। जिले की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए यह सख्ती अनिवार्य हो चुकी थी।









