देहरादून, 02 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में अवैध कॉलोनियों के मकड़जाल और प्रॉपर्टी डीलरों की धोखाधड़ी को जड़ से खत्म करने के लिए धामी सरकार ने ‘सुरक्षा कवच’ नीति तैयार की है। अब राज्य में केवल अवैध निर्माण को ध्वस्त करना ही अंतिम कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि जिस भूमि पर अवैध प्लॉटिंग पाई जाएगी, उसके खसरा नंबर को ही फ्रीज कर दिया जाएगा।
इस कदम का सीधा अर्थ यह है कि एक बार कार्रवाई होने के बाद संबंधित जमीन की दोबारा खरीद-बिक्री कानूनी रूप से असंभव हो जाएगी।
उत्तराखंड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (RERA) द्वारा तैयार किए गए इस खाके के तहत, शहरों के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में होने वाले अनियोजित विकास पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी है। वर्तमान व्यवस्था में अक्सर यह देखा गया है कि विकास प्राधिकरणों द्वारा अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त किए जाने के कुछ ही महीनों बाद प्रॉपर्टी डीलर उसी स्थान पर दोबारा काम शुरू कर देते थे। अब खसरा नंबर फ्रीज होने से कानून के इस ‘लूपहोल’ को स्थाई रूप से बंद कर दिया जाएगा।
नया समन्वय ढांचा और डेटा शेयरिंग
नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए रेरा और विभिन्न विकास प्राधिकरणों के बीच एक विशेष समन्वय प्रणाली विकसित की गई है। इसके तहत जैसे ही किसी अवैध प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी, प्राधिकरण तत्काल इसकी सूचना संबंधित विभागों को देगा। जिलाधिकारी, निबंधक और उप-निबंधक अब ध्वस्त की गई सभी अवैध साइटों का पूरा डेटा रेरा को सौंपेंगे, ताकि पोर्टल पर उन नंबरों को प्रतिबंधित श्रेणी में डाला जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों पर भी रहेगी पैनी नजर
रेरा ने स्पष्ट किया है कि अब उसकी निगरानी केवल विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित (Notified) क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगी। शहरों की सीमाओं से सटे ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में भी यदि कोई भूखंडों का उप-विभाजन (Sub-division) करता है या बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करता है, तो रेरा सीधे हस्तक्षेप करेगा। इससे उन क्षेत्रों में अनियंत्रित बस्तियों के बसने पर रोक लगेगी जहां नक्शा स्वीकृत कराए बिना बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं।
निवेशकों की सुरक्षा होगी पुख्ता
अक्सर कम कीमत के लालच में आम खरीदार ऐसी कॉलोनियों में निवेश कर देते हैं जहां न तो सरकारी सुविधाएं होती हैं और न ही मालिकाना हक सुरक्षित रहता है। रेरा के इस सख्त रुख से प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता आएगी। खरीदारों को अब प्लॉट लेने से पहले यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि संबंधित प्रोजेक्ट रेरा से पंजीकृत है या उसकी जमीन ‘फ्रीज’ श्रेणी में तो नहीं है।









