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Uttarakhand Pension Scheme : उत्तराखंड में बढ़ी पेंशन, विधवा और दिव्यांगों को अब मिलेंगे इतने रुपए , जानें नई दरें

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देहरादून, 17 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड की धामी सरकार ने समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाली पेंशन योजनाओं (Uttarakhand Pension Scheme) के लाभार्थियों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। प्रदेश में अब विधवा और दिव्यांग पेंशन की राशि ₹1500 से बढ़ाकर ₹1875 कर दी गई है। इसके साथ ही, पेंशन योजनाओं के लिए पात्रता की मासिक आय सीमा को भी ₹4000 से बढ़ाकर ₹6000 करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिससे हजारों नए परिवार इन योजनाओं के दायरे में आ सकेंगे।

गुरुवार को विधानसभा सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने अधिकारियों को इन संशोधनों के संबंध में तत्काल प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक आर्थिक मदद पहुँचाना है। बैठक में सचिव श्रीधर बाबू और निदेशक संदीप तिवारी सहित विभाग के तमाम उच्च अधिकारी मौजूद रहे।

पेंशन और अनुदान की नई प्रस्तावित दरें

सरकार ने केवल मुख्य पेंशन ही नहीं, बल्कि विशिष्ट श्रेणियों में मिलने वाली सहायता राशि में भी इजाफा किया है। बौना पेंशन और तीलू रौतेली पेंशन को ₹1200 से बढ़ाकर ₹1500 करने का प्रस्ताव है। वहीं, दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान को भी ₹700 से बढ़ाकर ₹1000 किया जाएगा। मंत्री खजान दास ने बताया कि अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत निर्धन बुजुर्गों को निशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में है।

अंतरजातीय विवाह और छात्रवृत्ति नियमों में बदलाव

सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए अंतरजातीय विवाह योजना की समय सीमा में महत्वपूर्ण सुधार किया गया है। अब सामान्य वर्ग की विधवा और एससी-एसटी परिवारों को यह सहायता राशि किसी वित्तीय वर्ष की बाध्यता के बिना, विवाह की तिथि से एक साल के भीतर प्रदान की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, मंत्री ने छात्रवृत्ति योजनाओं के सत्यापन में पारदर्शिता बरतने और आश्रम पद्धति विद्यालयों में अनुभवी प्रशिक्षकों की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।

आधारभूत संरचना और क्षेत्रीय विकास

बैठक में मसूरी स्थित बालिका इंटर कॉलेज के छात्रावास के पुनर्निर्माण की भी समीक्षा की गई, जिसे सितंबर 2026 तक संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए जिलेवार विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।

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