देहरादून, 27 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के शहरों से लेकर गांवों तक इन दिनों भीषण बिजली कटौती ने जनजीवन और उद्योगों की रफ्तार थाम दी है। यूपीसीएल (UPCL) प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि राज्य वर्तमान में गंभीर बिजली किल्लत से जूझ रहा है और यह स्थिति 30 अप्रैल तक बनी रह सकती है। हालांकि, विभाग ने दावा किया है कि 1 मई से बिजली की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर लौट आएगी।
उद्योगों और ग्रामीण क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा मार
बिजली की कमी का सबसे गंभीर असर राज्य के फर्नेस उद्योगों पर पड़ा है, जहां 12 से 13 घंटे तक आपूर्ति बाधित हो रही है। बहादराबाद स्थित सिडकुल समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था न होने से उत्पादन ठप है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में 4 से 6 घंटे और छोटे शहरों में 2 से 4 घंटे तक की घोषित-अघोषित कटौती की जा रही है। मांग में अचानक हुई 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने सिस्टम पर दबाव और बढ़ा दिया है।
क्यों गहराया अचानक संकट?
यूपीसीएल के अनुसार, इस संकट के पीछे कई वैश्विक और स्थानीय कारण जिम्मेदार हैं। ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण गैस की कीमतों में उछाल आया है, जिससे 321 मेगावाट क्षमता का गैस पावर प्लांट संचालित नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा, नदियों में पानी कम होने से जल विद्युत उत्पादन (Hydro Power) में करीब 100 मेगावाट की कमी आई है। केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली में भी 150 मेगावाट की कटौती हुई है।
एमडी की अपील और सरकारी प्रयास
यूपीसीएल के एमडी जीएस बुदियाल ने उपभोक्ताओं से 30 अप्रैल तक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि लोड प्रबंधन के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, धामी सरकार ने केंद्र से मई और जून के लिए 193-193 मेगावाट का अतिरिक्त कोटा देने का अनुरोध किया है।
ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल के मुताबिक, विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने मई के लिए चरणबद्ध तरीके से बिजली खरीद की मंजूरी दे दी है, जिससे आने वाले दिनों में राहत मिलने की उम्मीद है।









