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Uttarakhand RTO News : उत्तराखंड में DL में मोबाइल नंबर अपडेट करना अब नहीं होगा आसान, बदल गए नियम

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देहरादून, 10 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड परिवहन विभाग (Uttarakhand RTO News) ने ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू कर दी है।

अब यदि किसी आवेदक के ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और आधार कार्ड में दर्ज नाम के स्पेलिंग में एक अक्षर का भी अंतर पाया जाता है, तो सिस्टम मोबाइल नंबर अपडेट करने की अनुमति नहीं देगा। मोबाइल नंबर का पंजीकृत होना अब इसलिए भी अनिवार्य है क्योंकि डुप्लीकेट लाइसेंस और नवीनीकरण जैसी सेवाओं के लिए ओटीपी (OTP) की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है।

नाम में अंतर होने पर अपनानी होगी लंबी प्रक्रिया

यदि किसी आवेदक के दस्तावेजों में नाम की भिन्नता है, तो उसे पहले अपने ड्राइविंग लाइसेंस में नाम संशोधित करवाना होगा। विभाग ने इसके लिए सख्त नियम तय किए हैं।

आरटीओ प्रशासन देहरादून, संदीप सैनी के अनुसार, आवेदकों को नाम सुधारने के लिए एक शपथ पत्र (Affidavit) के साथ-साथ किसी भी राष्ट्रीयकृत समाचार पत्र में प्रकाशित नाम संशोधन विज्ञापन की मूल प्रति प्रस्तुत करनी होगी। इन दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के बाद ही विभाग नाम में सुधार करेगा, जिसके बाद ही मोबाइल नंबर लिंक हो सकेगा।

आरसी सेवाओं पर भी पड़ेगा असर

विभाग ने स्पष्ट किया है कि मोबाइल नंबर का अपडेट होना केवल लाइसेंस तक सीमित नहीं है। अब वाहन की आरसी (RC) में भी सक्रिय मोबाइल नंबर का होना अनिवार्य है। यदि मोबाइल नंबर लिंक नहीं है, तो वाहन स्वामी अपने वाहन का टैक्स जमा करने, फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करने, बीमा अपडेट कराने या चालान का भुगतान करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य ऑनलाइन नहीं कर पाएंगे। विभाग का तर्क है कि यह कदम डेटा की सटीकता बढ़ाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना की सुस्त रफ्तार

परिवहन विभाग की सख्ती के बीच युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने वाली ‘वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना’ के परिणाम निराशाजनक रहे हैं। वर्ष 2019 में रोडवेज के बेड़े में निजी बसें अनुबंधित करने की इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक मात्र 10 लाभार्थी ही इससे जुड़ सके हैं। प्रदेश सरकार द्वारा बस खरीद पर 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी और रोडवेज अनुबंध में प्राथमिकता देने के बावजूद युवाओं का रुझान कम बना हुआ है।

सूत्रों का कहना है कि रोडवेज के पुराने वित्तीय संकट और भुगतान में होने वाली देरी के डर से युवा बैंक लोन का भारी जोखिम नहीं उठाना चाहते। इसके अलावा, योजना के प्रचार-प्रसार की कमी और दुर्गम क्षेत्रों में जटिल आवेदन प्रक्रिया ने भी इसकी प्रगति को बाधित किया है। वर्तमान में, रोडवेज इन अनुबंधित बसों को आठ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करता है, जबकि डीजल और कंडक्टर की जिम्मेदारी रोडवेज खुद उठाता है।

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