देहरादून, 16 मई (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में आगामी 29 मई से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Uttarakhand voter list update) का काम शुरू होने जा रहा है। इस राज्यव्यापी अभियान के आधिकारिक आगाज से पहले ही निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में बड़ा फेरबदल सामने आया है। प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या में 4,53,459 की भारी कमी दर्ज की गई है। चुनाव कार्यालय के इस कदम का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनके नाम लंबे समय से बिना वेरिफिकेशन के सूची में चल रहे थे।
सॉफ्टवेयर की मदद से हटाए गए नाम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 तक उत्तराखंड में कुल वोटर्स की संख्या 84,29,459 दर्ज थी। हालिया शुद्धीकरण के बाद अब यह आंकड़ा घटकर करीब 79,76,000 रह गया है। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कमी मुख्य रूप से उन मतदाताओं के नाम हटाने के कारण हुई है जो या तो मृत हो चुके हैं, राज्य से पलायन कर चुके हैं या फिर लंबे समय से अनुपस्थित हैं।
अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने इस प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि यह कटौती एक नियमित और जरूरी वेरिफिकेशन का हिस्सा है। मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए एडवांस डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया है। इससे एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों (डुप्लीकेशन), मृत्यु और विस्थापन के मामलों को पकड़ा गया। देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह रिकॉर्ड को व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है।
23 साल बाद हो रहा है इतना बड़ा शुद्धीकरण
उत्तराखंड के चुनावी इतिहास में साल 2003 के बाद से इतने बड़े स्तर पर विशेष गहन संशोधन (SIR) नहीं किया गया था। दो दशकों से ज्यादा समय तक बड़ा अभियान न चलने के कारण वोटर लिस्ट में मृत और शिफ्ट हो चुके लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य में मतदाताओं का आंकड़ा 84,31,101 तक पहुंच गया था, जिसके बाद आयोग ने पूरे साल तकनीकी जांच चलाकर इस सूची को दुरुस्त करने का काम किया है।
9.76 लाख मतदाताओं को देना होगा विवरण
चुनाव कार्यालय अब तक करीब 70 लाख मतदाताओं की सफलतापूर्वक डिजिटल मैपिंग पूरी कर चुका है। हालांकि, लगभग 9,76,000 ऐसे मतदाता हैं जिनका 2003 का पुराना एनरोलमेंट रिकॉर्ड फिलहाल वैरिफाई (मैप) नहीं हो पाया है।
डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के मुताबिक, 29 मई से शुरू हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान इन चिन्हित मतदाताओं को एक विशेष फॉर्म जारी किया जाएगा। इस फॉर्म के माध्यम से उनसे साल 2003 के मूल पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज और जानकारी मांगी जाएगी। यदि मतदाता की ओर से दी गई जानकारी असंतोषजनक पाई जाती है या निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं मिलता है, तो नाम हटाने से पहले उन्हें एक औपचारिक अंतिम नोटिस दिया जाएगा।
नए वोटर्स के लिए खुला है मौका
वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने की इस कवायद के बीच चुनाव आयोग ने साफ किया है कि नए मतदाताओं को जोड़ने का काम प्रभावित नहीं होगा। यह प्रक्रिया समानांतर रूप से चलती रहेगी। जिन युवाओं की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी है या जिनके पास अब तक वोटर आईडी कार्ड नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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