दून हॉराइज़न, देहरादून (27 सितंबर) : मौसम विभाग द्वारा राज्य में रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित किए जाने के बाद उत्तराखंड शासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश के खतरे को देखते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने रविवार देर शाम खुद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (State Emergency Operations Centre – SEOC) का औचक जायजा लिया।
उन्होंने दो टूक निर्देश जारी किए हैं कि आम जनता और तीर्थयात्रियों की जान-माल की रक्षा में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित विभागों को 24×7 एक्टिव मोड में रहने का स्पष्ट आदेश दिया गया है।
पहाड़ों पर बारिश की मार सबसे ज्यादा सड़कों और नदी तटों पर पड़ती है। मुख्य सचिव ने स्थिति की समीक्षा करते हुए लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि संवेदनशील मार्गों पर जेसीबी और पोकलैंड जैसी भारी मशीनें पहले से तैनात रखी जाएं। जहां भी मलबा आए, यातायात तुरंत बहाल होना चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 15 अक्टूबर तक सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने की दी गई समयसीमा को दोहराते हुए उन्होंने अफसरों को स्पष्ट चेताया कि काम तय वक्त पर पूरा होना चाहिए। इसके अलावा, जिन इलाकों में बारिश से परिसंपत्तियों या फसलों का नुकसान हुआ है, उसका आकलन उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) को तुरंत भेजकर प्रभावितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए गए हैं।
नदियों के उफान और डैम से पानी छोड़े जाने को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया है। नदी किनारे की बस्तियों पर चौबीसों घंटे पहरा रहेगा। जलस्तर बढ़ते ही लोगों को फौरन सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। मुख्य सचिव ने साफ कहा कि चारधाम यात्रा को मौसम की वास्तविक रिपोर्ट देखकर ही संचालित किया जाए।
यदि मार्ग बाधित होता है तो यात्रियों को वहीं रोककर भोजन-पानी और ठहरने की व्यवस्था दी जाए। साथ ही, संवेदनशील गांवों की गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को वक्त रहते अस्पतालों या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को कहा गया है, जिसके लिए जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर सेवा भी दी जाएगी।
दूसरी तरफ, उत्तरकाशी और बागेश्वर के उच्च हिमालयी ट्रेकिंग रूटों पर मौसम बिगड़ने से ट्रेकर्स की सुरक्षा को लेकर विशेष रणनीति बनी है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बैठक में जानकारी दी कि उत्तरकाशी में 10 दलों के 136 और बागेश्वर में 3 दलों के 43 ट्रेकर्स, यानी कुल 179 लोग मौजूद हैं।
हालांकि, जिला प्रशासन बागेश्वर ने स्पष्ट किया है कि उनके 43 ट्रेकर्स पूरी तरह सुरक्षित पड़ावों पर हैं और उन्हें एहतियातन रोका गया है। शेष ट्रेकर्स की सुरक्षित निकासी के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के समन्वय से सोमवार सुबह 6 बजे से सघन हेली-रेस्क्यू शुरू किया जा रहा है।
इस रेस्क्यू अभियान में किसी भी तकनीकी रुकावट से बचने के लिए हेलीकॉप्टरों में सैटेलाइट फोन अनिवार्य किए गए हैं। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का पूरा स्टॉक रखने और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए एम्स ऋषिकेश व श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इसके साथ ही, मैदानी क्षेत्रों में जलभराव के चलते फैलने वाले डेंगू के लार्वा को नष्ट करने के लिए नगर निकायों को युद्धस्तर पर फॉगिंग और अस्पतालों में प्लेटलेट्स व बेड की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का टास्क सौंपा गया है।









