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Uttarakhand Weather : चारधाम यात्रा पर लगाया बारिश ने ब्रेक, मौसम विभाग ने जारी किया डराने वाला अलर्ट!

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देहरादून, 07 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Weather : पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश ने पूरे उत्तराखंड में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र ने 07 अगस्त 2026 की शाम जो आंकड़े जारी किए हैं, वे जमीनी हालात की भयावहता को स्पष्ट करते हैं। पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर कुंडाधार के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ है। यहां एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। इस दर्दनाक दुर्घटना में 5 लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है और एक अन्य यात्री लापता बताया जा रहा है। अंधेरा और बारिश होने के कारण राहत बचाव दल को खाई में उतरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

रुद्रप्रयाग जिले में नदियों का जलस्तर खौफ पैदा कर रहा है। अलकनंदा और मंदाकिनी दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। अलकनंदा खतरे के स्तर से 1.20 मीटर ऊपर है। मंदाकिनी भी 1.16 मीटर ऊपर बह रही है। नदी किनारे बसे गांवों और बस्तियों में प्रशासन ने मुनादी करवा दी है। लोगों को रात के समय सुरक्षित स्थानों पर जाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ने का अंदेशा लगातार बना हुआ है।

उत्तरकाशी की स्थिति भी बेहद संवेदनशील हो चुकी है। भागीरथी नदी का जलस्तर 1123.00 मीटर तक पहुंच गया है, जो 1122.00 मीटर के खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर है। नदी के उफान ने सीमांत इलाकों की कनेक्टिविटी काट दी है। जिले के मोरी, बड़कोट और धौन्तरी क्षेत्र के कई गांवों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है। लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। संचार सुविधाएं भी बाधित हो रही हैं जिससे आपातकालीन संदेश भेजने में दिक्कतें आ रही हैं।

मैदानी जिले हरिद्वार में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। खानपुर ब्लॉक में तटबंध कटने की सूचनाएं सामने आई हैं। गंगा नदी का वर्तमान स्तर 292.65 मीटर मापा गया है, जो 294.00 मीटर के खतरे के निशान के बेहद करीब है। तटबंध कटने से ग्रामीण इलाकों में पानी घुसने की पूरी संभावना है। प्रशासन ने सिंचाई विभाग की टीमों को रातों-रात तटबंध की मरम्मत के लिए मौके पर भेजा है।

पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूरे प्रदेश में कुल 116 सड़कें अवरुद्ध हैं। इनमें 1 नेशनल हाईवे, 2 स्टेट हाईवे और 94 ग्रामीण (PMGSY) सड़कें शामिल हैं। सबसे ज्यादा खराब हालात उत्तरकाशी के हैं जहां 21 सड़कें बंद हैं। देहरादून जिले की सीमा में भी 18 मार्ग मलबे की चपेट में हैं। चमोली में कर्णप्रयाग-थराली-ग्वालदम एनएच (NH-109K) पर भारी मलबा आ गया है। बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। नैनीताल में रामनगर-भण्डारपानी-अमगढ़ी राज्य मार्ग भी पहाड़ी दरकने से बंद पड़ा है।

चारधाम यात्रा के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अब तक 46,28,584 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। अकेले बद्रीनाथ धाम में 15,67,417 यात्री पहुंचे हैं। वहीं केदारनाथ में 14,34,942 श्रद्धालुओं ने माथा टेका है। गंगोत्री में 7,34,923 और यमुनोत्री में 6,59,943 यात्री दर्शन कर चुके हैं। खराब मौसम के बावजूद यात्रा मार्गों पर वाहनों का भारी दबाव है। अब तक 4,59,805 वाहन चारधाम पहुंच चुके हैं।

ऊंचाई वाले इन धामों पर स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। इस यात्रा सीजन में अब तक 210 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हो चुकी है। इनमें से 207 मौतें सामान्य कारणों (मुख्यतः हार्ट अटैक और ऑक्सीजन की कमी) से हुई हैं। केदारनाथ मार्ग पर सबसे ज्यादा 99 यात्रियों ने दम तोड़ा है। बद्रीनाथ में 67, यमुनोत्री में 26 और गंगोत्री में 18 यात्रियों की मृत्यु दर्ज की गई है। गंगोत्री में एक यात्री की जान प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से गई।

अन्य धार्मिक यात्राओं में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा (24 जुलाई से शुरू) में 06 अगस्त 2026 तक 2 करोड़ 19 लाख 70 हजार कांवड़िए पहुंच चुके हैं। नैनीताल के कैंची धाम में इस साल 25 लाख 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं, पिथौरागढ़ की आदि कैलाश यात्रा मानसून के खतरों को देखते हुए 2 जुलाई 2026 से ही स्थगित चल रही है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के पांच दल अपनी यात्रा पूरी कर चुके हैं। छठा दल अभी गुंजी-धारचूला लोकेशन पर है जिसमें 49 यात्री शामिल हैं। सातवां दल चीन के जिजेपू में है। आठवां दल लिपूलेख और नौवां दल गुंजी में मौजूद है। इस पूरी यात्रा में अब तक 290 पुरुष और 138 महिलाओं सहित कुल 428 यात्री शामिल हो चुके हैं। भारत-चीन सीमा पर मौसम पल-पल बदल रहा है।

इस साल 1 अप्रैल से अब तक प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य को गहरे जख्म दिए हैं। कुल 29 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 9 मौतें मानव-वन्यजीव संघर्ष का परिणाम हैं। 38 बड़े पालतू पशु और 771 छोटे पशु भी आपदा की भेंट चढ़ चुके हैं। 24 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए और 619 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ भी डराने वाला है। 1 जनवरी से लेकर अब तक हादसों में 219 लोगों की मौत हुई है और 804 लोग घायल हुए हैं।

आने वाले दिन उत्तराखंड के लिए और भारी साबित हो सकते हैं। मौसम विभाग (IMD) ने 07 से 13 अगस्त 2026 तक के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। 08 अगस्त को रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और बागेश्वर में भारी वर्षा का येलो अलर्ट है। 09 से 11 अगस्त के बीच स्थिति ज्यादा बिगड़ेगी। देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, चम्पावत और उत्तरकाशी में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। संवेदनशील इलाकों में चट्टानें खिसकने और भूस्खलन का खतरा सबसे ज्यादा है। नदियों और गदेरों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

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