देहरादून, 03 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand Weather Update : उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में लगातार जारी मानसूनी बारिश ने जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की चुनौती बढ़ा दी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र (यू०एस०डी०एम०ए०) की ओर से 3 अगस्त की शाम जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मौसम की दुश्वारियों के बावजूद चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की आवक का आंकड़ा 45 लाख के पार पहुंच चुका है। दूसरी ओर, भारी बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य में इस समय 84 सड़कें पूरी तरह बंद हैं, जिन्हें खोलने के लिए भारी मशीनें तैनात की गई हैं।
चारधाम यात्रा के तहत विगत दिवस तक 45,90,918 तीर्थयात्रियों ने चारों धामों और श्री हेमकुण्ड साहिब के दर्शन पूरे कर लिए हैं। इस दौरान कुल 4,48,694 वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई है। धामों की बात करें तो बद्रीनाथ में अब तक 15,55,690, केदारनाथ में 14,23,476, यमुनोत्री में 6,54,958 और गंगोत्री में 7,33,101 श्रद्धालु पहुंचे हैं। श्री हेमकुण्ड साहिब में 2,23,693 तथा गौमुख में 9,071 यात्रियों की मौजूदगी दर्ज हुई है।
यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और हादसों के चलते अब तक कुल 210 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 207 सामान्य मौतें हैं, जबकि केदारनाथ क्षेत्र में 3 मौतें प्राकृतिक आपदा और हादसों की श्रेणी में रखी गई हैं। अलग-अलग धामों में मौत के आंकड़ों को देखें तो केदारनाथ में सबसे ज्यादा 99, बद्रीनाथ में 67, यमुनोत्री में 26 और गंगोत्री में 18 तीर्थयात्रियों की जान गई है।
अन्य प्रमुख धार्मिक यात्राओं में भी भारी भीड़ देखी जा रही है। हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा में 2 अगस्त तक 45,35,000 से अधिक शिवभक्त पहुंचे हैं और 1,43,274 वाहनों का पंजीकरण दर्ज किया गया है। कैंची धाम में अब तक 24,84,867 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं, जबकि पूर्णागिरि में 24,50,600 और जागेश्वर धाम में 1,08,581 श्रद्धालुओं की आमद हुई है। पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा को मानसून के खतरे को देखते हुए 2 जुलाई से ही स्थगित रखा गया है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर राहत की खबर है, जहां आठ अलग-अलग दलों के माध्यम से कुल 380 यात्री (254 पुरुष और 126 महिला) यात्रा में शामिल हैं। पहले चार दलों ने अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। पांचवां दल गुंजी-धारचूला के लिए प्रस्थान कर चुका है, छठा दल चीन के जिंरेपू गेस्ट हाउस में मौजूद है, सातवां दल लिपूलेख से चीन सीमा की तरफ बढ़ा है और आठवां दल धारचूला से गुंजी की ओर रवाना हुआ है।
पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक हादसों का सिलसिला लगातार बना हुआ है। 3 अगस्त को दोपहर 12:25 बजे चमोली में 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। हालांकि इसका केंद्र 5 किलोमीटर की गहराई में था और झटके महसूस नहीं किए गए, जिससे किसी नुकसान की सीधी सूचना नहीं मिली। लेकिन चमोली के ज्योतिर्मठ स्थित ग्राम किमाणा में पहाड़ी से भारी मलबा गिरने के कारण 2 गौशालाएं पूरी तरह तबाह हो गईं और 25 काश्तकारों की 1.500 हेक्टेयर कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए 5 टेंट और 21 तिरपाल बांटे गए हैं तथा स्थानीय स्कूल को आश्रय स्थल के तौर पर तैयार रखा गया है।
देहरादून जिले के मालदेवता क्षेत्र से एक दर्दनाक हादसे की सूचना है। 2 अगस्त की रात करीब 8:36 बजे साहिल गुंसाई (उम्र 28 वर्ष) सोंग नदी के उफान में बह गए। युवक की तलाश में एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका था।
पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट तहसील स्थित ग्राम व्यालकटिया में 3 अगस्त की सुबह 10:30 बजे घास काटते समय पहाड़ी चट्टान से फिसलने के कारण 45 वर्षीय कौशल्या देवी की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कागजी कार्यवाही शुरू कर दी है।
मानसून के इस सीजन में 1 अप्रैल से अब तक राज्य में प्राकृतिक आपदाओं के कारण 28 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 9 मौतें वन्यजीवों के साथ संघर्ष में हुई हैं। आपदाओं में 30 लोग घायल हुए हैं, जबकि 34 बड़े पशु और 771 छोटे पशु मारे गए हैं। पूरे राज्य में भूस्खलन और बारिश से 523 मकान आंशिक रूप से, 23 गंभीर रूप से और 7 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। इसके अलावा 17 गौशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1 जनवरी से अब तक राज्य में हुए सड़क हादसों में 210 लोगों की मृत्यु, 773 लोग घायल और 9 लोग लापता दर्ज किए गए हैं।
यातायात की बात करें तो राज्य में कुल 84 सड़कें बंद पड़ी हैं। इनमें 1 राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), 2 राज्य राजमार्ग (SH), 11 पीडब्ल्यूडी सड़कें और 70 पीएमजीएसवाई व ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। उत्तरकाशी में एनएच-134 स्यानाचट्टी के पास भूस्खलन से बाधित है, जबकि चमोली में एनएच-07 को पागलनाला और भनेरपानी से मलबा हटाकर सुचारू कर दिया गया है। उत्तरकाशी के हर्षिल में भागीरथी नदी के कटाव को रोकने के लिए 557 वायरक्रेट और सुरक्षा बंदा बनाने का काम पूरा कर लिया गया है, जिसके बाद सुरक्षा के तहत शिफ्ट किए गए सरकारी दफ्तरों के बाद अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। टिहरी बांध का जलस्तर 803.14 मीटर दर्ज किया गया है और वहां से 13,720 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर 292.15 मीटर पर है, जो चेतावनी स्तर (293.00 मीटर) के बेहद करीब है। अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर, काली और गोमती नदियां भी उफान पर बह रही हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
मौसम विभाग (IMD) ने आगामी 9 अगस्त तक पूरे उत्तराखंड में हल्की से मध्यम वर्षा और गर्जन की संभावना जताई है। 3 से 6 अगस्त के दौरान देहरादून, बागेश्वर, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, चम्पावत और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है। मैदानी जिलों जैसे हरिद्वार और उधम सिंह नगर में आकाशीय बिजली चमकने और तीव्र बौछारें पड़ने की चेतावनी दी गई है।
प्रशासन ने भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनियों को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को ढलानों पर नजर रखने और सावधान रहने को कहा गया है। चारधाम यात्रा पर निकले यात्रियों को बेहद जरूरी होने पर ही आगे बढ़ने और सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की सलाह दी गई है। साथ ही उफनती नदियों, बरसाती नालों और जलभराव वाले रास्तों को पार न करने, और आकाशीय बिजली के समय पक्के मकानों में शरण लेने की सख्त हिदायत दी गई है।









