उत्तराखंड में नर्सिंग शिक्षा का बड़ा विस्तार। 11,495 कुल सीटों के साथ युवाओं को जापानी-जर्मन भाषा सिखाकर जापान और जर्मनी में सरकारी सहयोग से मिला सीधा रोजगार।
देहरादून (17 अक्टूबर) : उत्तराखंड की स्वास्थ्य शिक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां पारंपरिक नर्सिंग डिग्री को अब सीधे अंतरराष्ट्रीय रोजगार से जोड़ दिया गया है। सरकारी व निजी संस्थानों में कुल सीटों की संख्या 11,495 तक पहुंचने के बीच सबसे बड़ा मोड़ यह है कि यहां के प्रशिक्षित युवा अब जापान और जर्मनी जैसे विकसित देशों के अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य के नर्सिंग छात्रों को मेडिकल पाठ्यक्रमों के साथ-साथ जापानी, जर्मन और स्पैनिश जैसी विदेशी भाषाओं में विशेष तौर पर दक्ष बनाया जा रहा है, ताकि पहाड़ी राज्य के युवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के सीधे रास्ते खुल सकें।
विदेशी भाषाओं की ट्रेनिंग से मिला ग्लोबल रोजगार मंच
राज्य सरकार के इस अंतरराष्ट्रीय कौशल मॉडल का सीधा असर धरातल पर दिखने लगा है। वर्ष 2023 में जापानी भाषा में प्रशिक्षित दो बैचों के 60 अभ्यर्थियों को जापान के हेल्थकेयर सेक्टर में सीधा रोजगार मिला, जबकि वर्ष 2025 में 13 अभ्यर्थियों का चयन जर्मनी के लिए हुआ। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विदेशों में भारतीय नर्सों की भारी मांग को देखते हुए छात्रों को क्लिनिकल ट्रेनिंग के साथ ही संबंधित देशों के भाषा और कल्चरल मॉड्यूल पढ़ाए जा रहे हैं। इससे पहाड़ के युवाओं को राज्य स्तर की सीमित नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय सुरक्षित विदेशी करियर का विकल्प मिल रहा है।
तीन नए सरकारी कॉलेज खुले, 321 सीटें और जुड़ीं
जुलाई 2021 के बाद से प्रदेश में 3 नए राजकीय नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना की जा चुकी है, जिससे सरकारी क्षेत्र में 321 अतिरिक्त सीटें बढ़ी हैं। अब राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में कुल सीटें बढ़कर 879 हो गई हैं, जिनमें बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, एनपीसीसी और एनपीएम जैसे उच्च पाठ्यक्रम शामिल हैं।
वहीं निजी क्षेत्र में 76 संस्थानों को अनिवार्यता प्रमाणपत्र (Essentiality Certificate) जारी कर 5,138 नई सीटें मंजूर की गईं, जिसके बाद निजी कॉलेजों में कुल सीटें 10,616 तक पहुंच गई हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय (HNBUMU) की प्रवेश परीक्षा में हर साल 12 से 15 हजार युवाओं का शामिल होना बताता है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा और बिहार के छात्र भी अब उत्तराखंड का रुख कर रहे हैं।
नए पदों का सृजन, फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया तेज
शैक्षिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए फैकल्टी के स्तर पर भी बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार, दिसंबर 2021 से अब तक 66 नियमित नर्सिंग ट्यूटर और दर्जनों संकाय सदस्यों की तैनाती पूरी हो चुकी है। वर्तमान में 16 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की अंतिम चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति पत्र जारी करने की तैयारी है।
इसके अलावा 30 नए ट्यूटर पदों के लिए उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड (UKMSSB) को अधियाचन भेजा जा चुका है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि अस्पतालों में स्टाफ की कमी दूर करने के साथ-साथ युवाओं को देश और विदेश के बड़े मेडिकल नेटवर्क से जोड़ा जाए।









