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Uttarakhand News : उत्तराखंड बनेगा पूर्ण साक्षर राज्य, आगामी कैबिनेट बैठक में आएगा बड़ा प्रस्ताव

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देहरादून, 18 जून, 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड जल्द ही देश का अगला ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के ‘उल्लास’ (अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी) कार्यक्रम के तहत तय सभी साक्षरता मानकों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। शिक्षा विभाग अब इस संबंध में एक आधिकारिक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे आगामी राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य से संबंधित प्रस्ताव को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश जारी किए हैं। राज्य कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के तुरंत बाद इस प्रस्ताव को अंतिम घोषणा के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, उल्लास कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तराखंड की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक के स्तर पर पहुंच चुकी है।

इन मानकों पर मिली सफलता

राष्ट्रीय नियमों के तहत जब किसी राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के वयस्कों में साक्षरता की दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है, और लक्षित गैर-साक्षर आबादी तक शिक्षा पहुंच जाती है, तो उसे पूर्ण साक्षर माना जाता है। उत्तराखंड ने इस सीमा को पार कर लिया है। अब तक देश में मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम ही इस मुकाम को हासिल कर पाए हैं। उत्तराखंड यह गौरव पाने वाला देश का छठा राज्य बनेगा।

वंचित क्षेत्रों और महिलाओं पर रहा विशेष फोकस

इस अभियान के तहत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी। ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों को इससे सीधे जोड़ा गया। साक्षरता के साथ-साथ वयस्कों को महत्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल, बुनियादी शिक्षा और डिजिटल वित्तीय साक्षरता का भी प्रशिक्षण दिया गया है।

जनभागीदारी से बदला जमीनी परिदृश्य

इस अभियान की सफलता के पीछे एक मजबूत रणनीतिक ढांचा रहा है। प्रदेश के गांवों को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लिए सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों का सहयोग लिया गया। स्वयंसेवकों ने गांवों को गोद लेकर निरक्षर वयस्कों को व्यावहारिक शिक्षा प्रदान की, जिसका सीधा असर अब राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास सूचकांक पर दिखने लगा है।

आम जनता पर सीधा असर 

पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा मिलने से उत्तराखंड के नागरिकों को सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में आसानी होगी। बैंक खातों के संचालन, डिजिटल भुगतान और ब्लॉक-तहसील स्तर के कागजी कामों के लिए अब ग्रामीण आबादी को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, साक्षरता दर बढ़ने से राज्य को केंद्रीय शैक्षिक अनुदानों और नई योजनाओं के आवंटन में भी प्राथमिकता मिलेगी।

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