देहरादून, 18 जून 2026 (दून हॉराइज़न)। देहरादून में आगामी मानसून के दौरान जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन के खतरों से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जिला प्रभारी और प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में संवेदनशील नदी-नालों, सड़कों और आबादी क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजामों को समय से पहले दुरुस्त करने की समयसीमा तय की गई है। इस बार प्रशासन का मुख्य फोकस डेटा आधारित विश्लेषण और एडवांस प्लानिंग पर है।
73 गांवों और 89 स्कूलों के लिए विशेष सुरक्षा चक्र
समीक्षा बैठक में सामने आया कि जनपद के 73 गांव ऐसे हैं जहां भारी बारिश के दौरान मुख्य मार्ग प्रभावित होने से कनेक्टिविटी पूरी तरह टूट जाती है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव काल के दौरान किसी भी आपात स्थिति से बचाने के लिए मानसून से पहले ही नजदीकी चिकित्सालयों में शिफ्ट करने की नीति बनाई है, जहां उनके रहने और भोजन का खर्च स्वास्थ्य विभाग उठाएगा। इसके साथ ही, नदी-नालों के किनारे या संवेदनशील रास्तों पर स्थित 89 स्कूलों को चिन्हित कर वहां बच्चों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
आईएसबीटी और जलभराव वाले हॉटस्पॉट के लिए बनी संयुक्त टीम
हर साल राजधानी के आईएसबीटी और आसपास के इलाकों में होने वाले गंभीर जलभराव से निपटने के लिए इस बार एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। एमडीडीए (MDDA), लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन को मिलाकर एक स्पेशल जॉइंट टीम बनाई गई है। यह टीम समन्वित रूप से काम करेगी ताकि जलनिकासी की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके। इसके अलावा, शहर में शॉर्ट ड्यूरेशन हाई इंटेंसिटी रेनफॉल (कम समय में अत्यधिक बारिश) वाले इलाकों की मैपिंग कर वहां एडवांस में 39 डी-वॉटरिंग पंप तैनात किए जा रहे हैं।
इस मानसून में देहरादून की सड़कों पर जलभराव की समस्या को कम करने के लिए कुल 169 नालों में से 153 की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है। किमाड़ी और अन्य 12 क्रॉनिक स्लिप जोन (भूस्खलन क्षेत्रों) पर मलबे को तुरंत हटाने के लिए हैवी मशीनरी की तैनाती की जा रही है, जिससे मसूरी और आसपास के पर्वतीय रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को लंबे जाम और रास्तों के बंद होने की समस्या से राहत मिलेगी। साथ ही, लीकेज मैपिंग में मिले 18 रिसाव स्थलों को ठीक किया जा रहा है जिससे शुद्ध पेयजल की आपूर्ति बाधित न हो।
ग्राउंड जीरो पर पहुंचे प्रमुख सचिव, पुनर्वास कार्यों की जांच
बैठक के बाद प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कार्लीगाड़ एवं माझाड़ा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने वहां चल रहे आपदा प्रभावितों के पुनर्वास कार्यों और नदी चैनलाईजेशन के प्रोजेक्ट्स की प्रगति देखी। मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वार रूम और कंट्रोल रूम को 24 घंटे सातों दिन (24×7) एक्टिव रखने के आदेश दिए गए हैं ताकि सूचना मिलते ही तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।









