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2022 से 2026 तक सिर्फ तारीखें बदलीं, नहीं मिले जवाब: अंकिता केस पर गरिमा दसौनी का सरकार पर तंज

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दून हॉराइज़न, देहरादून (15 सितंबर): अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) की चौथी बरसी से ठीक पहले उत्तराखंड का सियासी पारा फिर चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार पर राजनीतिक उत्सवों में मशगूल होकर पहाड़ की बेटी के इंसाफ को भुला देने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने देहरादून में बयान जारी कर सत्ता पक्ष से तीखे सवाल पूछे।

उत्सवों के शोर में 18 सितंबर की तारीख याद रखे सरकार

कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि 16 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जन्मदिन है और 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का। सत्ताधारी दल कई दिनों तक इन आयोजनों के उल्लास में डूबा रहता है, मगर 18 सितंबर की तारीख आते ही खामोशी छा जाती है। दसौनी के अनुसार, 18 सितंबर 2022 को यमकेश्वर ब्लॉक स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट से शुरू हुई उस दरिंदगी को पूरा प्रदेश आज भी नहीं भूल सका है।

पहाड़ी पृष्ठभूमि से निकली एक 19 वर्षीय युवती अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए काम करने गई थी, लेकिन व्यवस्था की लापरवाही और रसूखदारों के दबाव के चलते उसे जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि जश्न मनाने पर किसी को ऐतराज नहीं, पर सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि न्याय का इंतजार कर रही एक मां की आंखें आज भी सूनी हैं।

CBI जांच की सुस्त रफ्तार और कथित VIP एंगल पर घेराव

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लंबे जनआंदोलनों और मृतका के माता-पिता के लगातार संघर्ष के बाद राज्य सरकार ने जनवरी 2026 में जाकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI Probe) की सिफारिश की थी। इसके बाद फरवरी 2026 में जांच एजेंसी ने मामला हाथ में लिया।

दसौनी ने सवाल दागा कि आखिर कई महीने बीत जाने के बाद भी जांच किस दिशा में आगे बढ़ी? क्या जांच एजेंसी ने उस कथित वीआईपी के रसूख और पहचान की तह तक जाने की कोशिश की, जिसे ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देने से इनकार करने पर अंकिता को मौत के घाट उतारने का आरोप लगा था? उन्होंने कहा कि घटना के तुरंत बाद रिजॉर्ट में बुलडोजर चलाकर साक्ष्य नष्ट किए जाने के गंभीर आरोपों पर भी आज तक जनता को स्पष्ट उत्तर नहीं मिल सका है।

‘चुनावी मुद्दा नहीं, पूरे उत्तराखंड के आत्मसम्मान की लड़ाई’

विपक्ष ने दो टूक कहा कि उनके लिए यह मामला किसी सियासी नफे-नुकसान का जरिया नहीं बल्कि पूरे राज्य के जमीर और नारी सम्मान की कसौटी है। दसौनी ने मांग रखी कि केंद्र व राज्य सरकार अविलंब सीबीआई जांच का आधिकारिक स्टेटस सार्वजनिक करे ताकि अंकिता के बुजुर्ग माता-पिता को मालूम हो सके कि उनकी बेटी के हत्यारों और साजिशन पर्दा डालने वालों को कानून के शिकंजे में लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

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