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रेखा आर्या का खुला चैलेंज, पति 210 करोड़ का सबूत दें तो केस वापस लूंगी

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने पति के 210 करोड़ रुपये के आरोपों पर अस्पताल से पलटवार किया। पुलिस ने कैंट थाने में दर्ज केस पर एसआईटी गठित की।

देहरादून (17 अक्टूबर) : उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच छिड़ा विवाद अब कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर गरमा गया है। देहरादून के कैंट थाने में पति के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने के बाद अस्पताल में भर्ती रेखा आर्या ने 210 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर खुला पलटवार किया है।

उन्होंने साफ कहा कि अगर उनके पति 210 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का एक भी पुख्ता सबूत सामने रख दें, तो वह अपनी पुलिस शिकायत तुरंत वापस ले लेंगी। दूसरी ओर, हाई-प्रोफाइल मामले की नजाकत को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने निष्पक्ष पड़ताल के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है।

सबूत लाएं तो केस वापस लूंगी, मंत्री की दो टूक

अस्पताल के बेड से अपनी बात रखते हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने पति द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में पोषण आहार या राशन वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी का दावा पूरी तरह मनगढ़ंत है। मंत्री ने कहा, “मैंने अपने विभाग में पूरी ईमानदारी से दायित्व निभाया है। दबाव बनाने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। अगर उनके पास कोई साक्ष्य हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करें।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह एक सामान्य नागरिक की तरह न्याय व्यवस्था पर भरोसा कर रही हैं और कानून निष्पक्ष होकर सच सामने लाएगा।

छिपाकर की शादी, प्रताड़ना और फर्जी हस्ताक्षर का आरोप

विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट कोतवाली में पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ औपचारिक तहरीर दी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विवाह के वक्त उनसे यह सच छिपाया गया कि गिरधारी लाल पहले से शादीशुदा थे। इसके अलावा तहरीर में मानसिक प्रताड़ना, जातिसूचक टिप्पणियों, फर्जी हस्ताक्षर कर एक कंपनी के निदेशक पद से हटाने और जान से मारने की साजिश रचने जैसे गंभीर दावे किए गए हैं।

इसके जवाब में गिरधारी लाल साहू ने वीडियो संदेश जारी कर मंत्री पर 210 करोड़ रुपये के कथित अवैध लेन-देन का दावा किया था, जिसके बाद यह पारिवारिक टकराव प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद में बदल गया।

एसआईटी गठित, पुलिस जुटा रही दोनों पक्षों के साक्ष्य

देहरादून पुलिस ने कैंट थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर औपचारिक जांच की कमान एसआईटी को सौंप दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में प्रस्तुत वीडियो बयानों, वित्तीय लेन-देन के दावों और कंपनी के दस्तावेजों की फोरेंसिक व तकनीकी स्तर पर जांच की जा रही है। जांच अधिकारी दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों और काउंटर-आरोपों के संदर्भ में दस्तावेजी साक्ष्य जुटा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि कानून के मुताबिक हर पहलू की निष्पक्ष जांच होगी और तथ्यों के आधार पर ही आगे की विधिक कार्रवाई तय की जाएगी।

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