रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू विवाद पर भाजपा नेता खजान दास के बयान से सियासी हलचल तेज। जानिए शादी, मुकदमों और 210 करोड़ के आरोपों पर क्या कहा।
देहरादून (19 अक्टूबर) : उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा विवाद अब भाजपा के भीतर ही असहज स्थिति पैदा करने लगा है। पार्टी नेता खजान दास ने इस पारिवारिक कलह पर खुलकर बोलते हुए एफआईआर की टाइमिंग और शादी के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्होंने साफ कहा कि रेखा आर्या घरेलू हिंसा की शिकार तो हैं, लेकिन जब गिरधारी लाल का आपराधिक इतिहास पहले से था और अब बच्चे भी बड़े हो चुके हैं, तब इतने बरसों बाद उत्पीड़न और जातिसूचक शब्दों के आरोप सामने आना देवभूमि की छवि के लिए ठीक संदेश नहीं है।
शादी के फैसले और मुकदमों पर खजान दास ने घेरा
खजान दास ने पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रेखा आर्या के वैवाहिक जीवन को लंबा अरसा बीत चुका है। गिरधारी लाल साहू पर पहले से कई गंभीर आरोप और मुकदमे दर्ज थे, ऐसे में शादी का फैसला लेते वक्त ही इन सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए था।
उन्होंने दो-टूक कहा कि इतने सालों बाद जब बच्चे बालिग हो चुके हैं, तब अचानक उत्पीड़न की बात सामने आना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों का एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से कीचड़ उछालना और कानूनी दांव-पेंच आजमाना समाज और राजनीति, दोनों के लिहाज से बेहद अनुचित है।
कैंट थाने में एफआईआर और 210 करोड़ का पलटवार
विवाद की शुरुआत 15 अक्टूबर को हुई, जब मंत्री रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट थाने में पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने मामले में मारपीट, घरेलू हिंसा, जान से मारने की धमकी, धोखाधड़ी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया।
इसके तुरंत बाद गिरधारी लाल साहू ने वीडियो बयान जारी कर खुद पर लगे आरोपों को झूठा बताया और मंत्री पर 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जुटाने के गंभीर आरोप लगा दिए। रेखा आर्या ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनका जीवन खुली किताब है और ये दावे सिर्फ ध्यान भटकाने की साजिश हैं।
एसआईटी की बरेली में दबिश और संभावित कानूनी एक्शन
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग ने एसपी देहात जया बलूनी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। एसआईटी ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए गिरधारी लाल साहू के बरेली स्थित ठिकानों और अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर जरूरी दस्तावेज जब्त किए हैं, हालांकि आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है।
कानूनी जानकारों के मुताबिक एससी-एसटी एक्ट और गैर-जमानती धाराओं के चलते आरोपी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। वहीं शासन और संगठन दोनों ही इस बात से चिंतित हैं कि एक कैबिनेट मंत्री के इस खुले विवाद से विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का सीधा मौका मिल गया है।









