उत्तराखंड में जैनी प्रकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। हरक सिंह रावत की चेतावनी के बाद भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा है।
देहरादून (31 अक्टूबर) : उत्तराखंड की राजनीति में दो दशक पुराना चर्चित जैनी प्रकरण एक बार फिर नए सियासी विवाद की वजह बन गया है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत द्वारा भाजपा नेताओं को दी गई चेतावनी के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पूरे मामले में कांग्रेस के केंद्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक व मुख्य प्रवक्ता विनोद चमोली ने देहरादून में मोर्चा खोलते हुए कहा कि जनता के बीच नैतिकता का दावा करने वाली कांग्रेस को इस संवेदनशील और पुराने विवाद पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
हरक सिंह की चेतावनी के बाद सियासी घमासान तेज
भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक विनोद चमोली ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सवालों से भागने या विरोधियों को खुली चेतावनियां देने से अतीत के दाग नहीं धुलते। उन्होंने कहा कि हाल ही में कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत की ओर से भाजपा नेताओं को दी गई चेतावनी के बाद इस पूरे मामले पर बहस और तेज हो गई है।
चमोली के अनुसार, जब जनता से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने वाले किसी बड़े चेहरे पर गंभीर प्रकरणों के छींटे रहे हों, तो टकराव की भाषा बोलने के बजाय तथ्यों के साथ जनता के सामने सच रखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता किसी एक दल की बपौती नहीं, बल्कि सबकी साझा जिम्मेदारी है।
दो दशक पुराने जैनी कांड पर कांग्रेस की चुप्पी
सियासी गलियारों में यह विवाद वर्ष 2003 के उस चर्चित घटनाक्रम से जुड़ा है, जब तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल के दौरान यह प्रकरण सामने आया था और उत्तराखंड से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हलचल मच गई थी। भाजपा का कहना है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व आज तक चुप्पी साधे हुए है। विनोद चमोली ने सवाल दागा कि दूसरों से शुचिता की उम्मीद रखने वाली कांग्रेस अपने ही वरिष्ठ नेताओं से जुड़े विवादों पर पर्दा क्यों डालती है?
उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी से जनता को गुमराह करने के बजाय कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस मामले पर उसका आधिकारिक रुख क्या है और वह अपने नेताओं के आचरण को लेकर कितनी गंभीर है।
राजनीतिक जवाबदेही और सार्वजनिक मर्यादा पर सीधे सवाल
पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान की मौजूदगी में भाजपा ने साफ कर दिया कि यह केवल चुनावी तकरार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा का सवाल है। चमोली ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता और जवाबदेही लोकतंत्र के मुख्य आधार स्तंभ हैं। यदि कोई नेता सार्वजनिक मंचों से चेतावनी भरे लहजे में बात करता है, तो जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि पुराने विवादों की जमीनी सच्चाई क्या है।
भाजपा का रुख साफ है कि कांग्रेस नेतृत्व को चेतावनी की सियासत के पीछे छिपने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मुद्दे को लेकर पार्टी जनता के बीच कांग्रेस की कथित दोहरी नीति को उजागर करती रहेगी।









