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रामनगर में तड़के 6:30 बजे गरजा बुलडोजर, 82 कच्चे-पक्के मकान किए गए ध्वस्त

रामनगर के तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अपर कोसी क्षेत्र में प्रशासन ने सुबह-सुबह बुलडोजर चलाकर 82 मकान ध्वस्त कर दिए। पूरे क्षेत्र को 14 सेक्टरों में बांटा गया।

रामनगर ((31 अक्टूबर) : उत्तराखंड में वन भूमि खाली कराने की मुहिम के तहत रामनगर के तराई पश्चिमी वन प्रभाग स्थित अपर कोसी क्षेत्र में शनिवार सुबह 6:30 बजे प्रशासन का बुलडोजर गरज पड़ा। पुलिस, पीएसी और वन विभाग की संयुक्त मौजूदगी में फेज-2 ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर 80 से 82 परिवारों के कच्चे-पक्के मकानों को जमींदोज कर दिया गया। हाईकोर्ट में सुनवाई लंबित होने के कारण 9 से 10 मकानों को फिलहाल छोड़ दिया गया है, जबकि बाकी समूचे इलाके को 4 सुपर जोन, 7 जोन और 14 सेक्टरों में बांटकर छावनी में तब्दील कर दिया गया।

तड़के सुबह गरजा बुलडोजर, आशियाने छोड़कर रोते दिखे परिवार

प्रशासन की टीम तड़के पुलिस बल और दमकल गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंची और भारी विरोध की आशंका के बीच सीधे ध्वस्तीकरण शुरू कराया। कार्रवाई की भनक लगते ही देर रात से ही कई परिवारों ने खुद अपने आशियानों को तोड़ना शुरू कर दिया था। लोग दरवाजों की चौखटें, ईंटें और टिन शेड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर सुरक्षित जगहों पर ले जाते दिखाई दिए। ठंड के मौसम में अचानक छत छिन जाने से महिलाओं और बच्चों में रोना-पीटना मच गया। प्रभावित लोगों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था के उन्हें खुले आसमान के नीचे छोड़ दिया गया।

कानूनी पेच में फंसे दस मकान, बाकी पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

प्रशासन के मुताबिक, फेज-2 अभियान में पहले 90 से अधिक निर्माण चिह्नित किए गए थे। हालांकि, करीब 10 परिवारों ने ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय की शरण ली थी, जहां मामले विचाराधीन होने के चलते प्रशासन ने कानूनी अड़चनों से बचने के लिए उन ढांचों को सील या सुरक्षित रखा है। इससे पहले साल 2025 में फेज-1 के तहत इसी इलाके में 51 परिवारों के अवैध कब्जे हटाए गए थे। वन भूमि पर बढ़ते मानवीय दखल को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद वन विभाग ने इस पूरे बेल्ट को खाली कराने का खाका खींचा था।

चौदह सेक्टरों में बंटा इलाका, वन भूमि की नापजोख तेज

शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम और पुलिस क्षेत्राधिकारी की अगुवाई में भारी फोर्स तैनात रही ताकि किसी भी स्तर पर टकराव न हो। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खाली कराई जा रही सरकारी और वन विभाग की जमीन की तत्काल बाउंड्री व तारबंदी की जाएगी ताकि दोबारा अतिक्रमण न पनप सके। राजस्व विभाग और वन विभाग की टीमें जमीन का सीमांकन कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, वन अधिनियम के तहत आरक्षित भूभाग पर अवैध निर्माण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगामी दिनों में भी यह अभियान जारी रहेगा।

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