देहरादून, 5 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Badrinath Donation : श्री बदरीनाथ धाम के पवित्र गर्भगृह और बाहरी परिसर में रखे दान पात्रों से भारी मात्रा में चढ़ावे की चोरी के संगीन आरोपों ने बीकेटीसी प्रबंधन को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। शनिवार को मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने आनन-फानन में चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी के गठन पर मुहर लगा दी।
इस विशेष दल में बीकेटीसी के विधि अधिकारी शीशपाल बर्तवाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र नैथानी और वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल जैसी भारी-भरकम टीम को शामिल किया गया है, जिन्हें सिर्फ एक सप्ताह के भीतर तफ्तीश पूरी कर रिपोर्ट टेबल पर रखनी होगी। केदारनाथ मंदिर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डबल सिंह भुजवाण को भी चौथे सदस्य के तौर पर नामित किया गया है।
वैयक्तिक सहायक समेत चार कर्मचारियों को नोटिस थमाकर कड़े शब्दों में स्पष्टीकरण तलब किया गया है। दो दिन पहले भैरव सेना ने बीकेटीसी को ज्ञापन सौंपकर चढ़ावे में हेराफेरी का सीधा आरोप लगाते हुए हड़कंप मचा दिया था। अब विभाग को इन कर्मचारियों के जवाब का इंतजार है।
जांच कमेटी सीधा चढ़ावा गणना से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ-साथ मंदिर परिसर के तमाम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। सूत्रों ने साफ किया है कि मुख्य चढ़ावा कक्ष के भीतर लगे कैमरों की फुटेज बेहद धुंधली है। जांच टीम अब गलियारे और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था में लगे पांच अन्य कैमरों से सुराग जुटाने की मशक्कत कर रही है।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने चोरी के इन आरोपों को एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा होने की गहरी आशंका जताई है। उनका कड़ा रुख है कि मामले का संज्ञान तत्काल लिया गया और जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल दागे हैं। महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल और महासचिव डॉ. बृजेश सती ने संयुक्त बयान जारी किया। महापंचायत ने कहा कि मंदिर की छवि खराब होने से श्रद्धालुओं की भावनाएं सीधे तौर पर आहत हो रही हैं और निष्पक्ष जांच रिपोर्ट फौरन सार्वजनिक होनी चाहिए।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने पिछले एक ही महीने के भीतर दो अलग-अलग जांचों के आदेश जारी किए हैं। पहली जांच का कोई नतीजा अब तक सार्वजनिक पटल पर नहीं रखा गया है। इसके तुरंत बाद ही यह एक और नई जांच का फरमान आ गया है।
बदरीनाथ धाम में भगवान को अर्पित होने वाले भेंट की पूरी गिनती मंदिर के ठीक पीछे बने एक सुरक्षित कमरे में की जाती है। मंदिर और इस कक्ष के बीच केवल परिक्रमा पथ का फासला है। कमरे के बाहरी हिस्से में एक जाली लगी है। कोई भी व्यक्ति जाली के बाहर खड़े होकर भेंट की गणना को अपनी आंखों से देख सकता है।
गिनती के दौरान भीतर सिर्फ मंदिर समिति के अधिकृत कर्मचारी मौजूद रहते हैं और वे खुद अंदर से ताला जड़कर यह काम करते हैं। इन कर्मचारियों की हर हरकत पर सीसीटीवी की सीधी नजर रहती है। कमरे के ठीक बाहर पुलिस के जवानों और मंदिर समिति के अपने गार्ड्स का कड़ा पहरा रहता है।
धाम में दो बड़े दान पात्र सीधे गर्भगृह में स्थापित हैं। तीन अन्य दान पात्र गर्भगृह के ठीक बाहर वाले हिस्से में रखे गए हैं। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को जब भी महसूस होता है कि दान पात्र पूरी तरह भर चुके हैं, वे उन्हें सीधे गिनती वाले कक्ष में ले जाते हैं। तय कर्मचारी उसी वक्त वहां गिनती के लिए मौजूद रहते हैं।









