दून हॉराइज़न, देहरादून (11 सितंबर): उत्तराखंड की राजधानी और आसपास के इलाकों में मौसमी बीमारियों का दोहरा प्रकोप गहराने लगा है, जहां स्वाइन फ्लू (H1N1 Swine Flu) के मरीजों की तादाद लगातार उछाल मार रही है। गुरुवार को सामने आई जांच रिपोर्ट ने एक बार फिर स्वास्थ्य महकमे के कान खड़े कर दिए हैं।
115 संदिग्ध सैंपलों की लैब जांच में 25 लोगों में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें से 11 संक्रमित अकेले देहरादून शहर से हैं, जबकि 14 मरीज जिले के ग्रामीण व सीमावर्ती इलाकों में चिह्नित किए गए हैं।
जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल मामलों की संख्या 408 दर्ज की जा चुकी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा द्वारा जारी आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, कुल संक्रमितों में से 324 मरीज उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। चिंता की बात यह है कि इस सीजन में दो मरीज संक्रमण के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं।
फिलहाल जिले में 82 एक्टिव मरीजों की निगरानी की जा रही है। हालांकि, राहत भरा पहलू यह रहा कि समान लक्षण वाले कोविड-19 टेस्ट में एक भी नया मामला सामने नहीं आया।
स्वाइन फ्लू के साथ-साथ वेक्टर जनित बीमारियां भी दूनवासियों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। बीते 24 घंटे में डेंगू के 648 सैंपलों की एलाइजा जांच कराई गई, जिनमें से 5 मरीजों में डेंगू संक्रमण की तस्दीक हुई। इनमें दो मरीज शहर और तीन मरीज देहात क्षेत्र से हैं।
अब तक जिले में डेंगू (Dengue Cases) के 150 मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें से 128 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और किसी भी मरीज की मौत दर्ज नहीं हुई है।
बढ़ते संक्रमण को थामने के लिए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम ने संयुक्त ग्राउंड एक्शन शुरू कर दिया है। गुरुवार को आशा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमों ने राजधानी के 11,872 घरों में सघन डोर-टू-डोर सर्विलांस चलाया। टीम के सदस्य घर-घर जाकर इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों (ILI) वाले संदिग्धों का ब्योरा जुटा रहे हैं। शहर के हॉटस्पॉट इलाकों में मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए ‘सोर्स रिडक्शन’ और लार्वीसाइड केमिकल का छिड़काव किया जा रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मोहल्ले या वॉर्ड में फॉगिंग नहीं हो पा रही है, तो नागरिक सीधे अपने स्थानीय पार्षद अथवा नगर निगम कंट्रोल रूम से संपर्क कर छिड़काव सुनिश्चित करवा सकते हैं।
चिकित्सकों ने बदलते मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को लेकर खास सतर्कता बरतने की सलाह दी है। तेज बुखार, सूखी खांसी या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों को सामान्य मौसमी जुकाम समझकर अनदेखा न करें और बिना डॉक्टरी परामर्श के मेडिकल स्टोर से दवाएं लेने से बचें।









