दून हॉराइज़न, देहरादून (9 सितंबर): उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और आम जनता के लिए राहत भरी खबरें हैं। शासन स्तर पर स्वास्थ्य और ऊर्जा विभाग से जुड़े दो अहम फैसले लिए गए हैं, जिनका सीधा असर लाखों परिवारों पर पड़ेगा।
यह भी पढ़ें : राहुल गांधी पर केस करने वाले की जाति पर विवाद, वाल्मीकि समाज ने पुलिस को दी तहरीर
एक ओर जहां ‘स्टेट हेल्थ गोल्डन कार्ड’ (State Health Golden Card) के तहत अब बिना अस्पताल में भर्ती हुए भी मुफ्त इलाज का रास्ता साफ हो रहा है, वहीं ऊर्जा निगम ने हादसों में जान गंवाने वालों के लिए मुआवजा राशि में भारी इजाफा किया है।
गोल्डन कार्ड: ओपीडी बिलों के झंझट से मिलेगी मुक्ति
लंबे समय से राज्य के कर्मचारी एक ही मांग कर रहे थे। मांग थी—ओपीडी सेवाओं को कैशलेस करना। दरअसल, अभी तक गोल्डन कार्ड धारकों को केवल आईपीडी (अस्पताल में भर्ती होने पर) सुविधा का लाभ मिलता था। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने, जांच कराने और दवा खरीदने का खर्च कर्मचारियों को खुद उठाना पड़ता था। इसके बाद बिल प्रतिपूर्ति (reimbursement) के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे और पैसा मिलने में महीनों लग जाते थे।
हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कर्मचारी संगठनों के साथ लंबी वार्ता की। इसके बाद उन्होंने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को ओपीडी कैशलेस करने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं। योजना धरातल पर उतरेगी कैसे? इसके लिए प्राधिकरण को प्रदेश भर के प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटरों और मेडिकल स्टोरों के साथ विशेष एमओयू साइन करने होंगे ताकि मरीजों को पर्चा दिखाते ही सीधे दवा मिल सके।
बिजली विभाग का बड़ा फैसला, 10 लाख हुआ मुआवजा
मंगलवार को देहरादून स्थित राज्य सचिवालय में ऊर्जा निगम (UPCL) के निदेशक मंडल की अहम बैठक बुलाई गई। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुए इस मंथन में जन सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया।
सबसे बड़ा फैसला करंट लगने से होने वाली मौतों को लेकर हुआ। पहले इस तरह के दर्दनाक हादसों में आम नागरिकों की जान जाने पर महज चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता था। अब यूपीसीएल बोर्ड ने इसे सीधे 10 लाख रुपये कर दिया है। ड्यूटी के दौरान लाइनमैन या अन्य बिजली कर्मियों के साथ होने वाली अनहोनी पर भी आर्थिक सुरक्षा बढ़ाई गई है। मृतक आश्रितों को मिलने वाली 1.50 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि को 5 लाख कर दिया गया है। वहीं अधिकतम सहायता स्लैब 6 लाख से उछलकर 17.50 लाख रुपये पहुंच गया है।
1320 मेगावाट थर्मल प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी
इसी बोर्ड बैठक में राज्य की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर भी मुहर लगी। कैबिनेट से पहले ही पास हो चुके 1320 मेगावाट थर्मल पावर प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को बोर्ड ने अपनी अंतिम स्वीकृति दे दी है। अगली प्रक्रिया के तहत अब पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) का ड्राफ्ट उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। वहीं, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से पोषित प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकताओं को लेकर बोर्ड ने निगम को दोबारा होमवर्क करने और संशोधित प्रस्ताव पेश करने को कहा है। बैठक में वित्त सचिव दिलीप जावलकर और यूपीसीएल व यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक मौजूद रहे।
यह भी पढ़ें : दूनवासियों को मिली साफ हवा, 3 साल के भीतर 41वें से 12वें पायदान पर पहुंची राजधानी









