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दून अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से बड़ा फर्जीवाड़ा, अपने कार्ड पर करा दी किसी और की हार्ट सर्जरी

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देहरादून, 31 मई (दून हॉराइज़न)। देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज में बड़ी धोखाधड़ी सामने आई है। यहां एक व्यक्ति ने अपने आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल कर अपने परिचित की हार्ट सर्जरी करवा दी। अस्पताल प्रशासन ने बिना सही दस्तावेजों की जांच किए मरीज को तीन स्टेंट भी डाल दिए। यह पूरा मामला डिस्चार्ज के वक्त तब खुला, जब विभागीय प्रक्रिया के तहत मरीज की तस्वीर मांगी गई।

देहरादून निवासी मंजीत पर आरोप है कि उसने अपने आयुष्मान कार्ड पर मेरठ (ओल्ड हस्तिनापुर मवाना) निवासी विक्की को अस्पताल के हृदय रोग विभाग में भर्ती कराया। मंजीत ने विक्की को अपनी जगह दिखाकर उसका ऑपरेशन करवा दिया। इस पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया।

डिस्चार्ज के समय फोटो मांगने पर खुली पोल

यह फर्जीवाड़ा शुक्रवार को तब पकड़ में आया जब आयुष्मान अनुभाग ने क्लेम की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मरीज के बेड साइड का फोटो मांगा। तस्वीर से पहचान खुलने के डर से आरोपी ने भर्ती मरीज विक्की को अस्पताल से भगा दिया। इसके बाद अस्पताल परिसर में करीब चार घंटे तक भारी हंगामा हुआ।

पूछताछ में मंजीत लगातार अपने बयान बदलता रहा। कभी उसने विक्की को अपना साला बताया, तो कभी सिर्फ एक परिचित। मामले को रफा-दफा करने के लिए उसने इलाज में खर्च हुए डेढ़ लाख रुपये नकद चुकाने की पेशकश भी की। शुरुआत में अस्पताल प्रबंधन भी समझौता करने के पक्ष में दिखा, लेकिन मीडिया के दखल और आयुष्मान कमेटी की सख्ती के बाद कार्रवाई शुरू की गई।

प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस कार्रवाई

इस घटना ने दून अस्पताल की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भर्ती होने से लेकर ऑपरेशन पूरा होने तक किसी भी स्तर पर दस्तावेजों और मरीज की सही पहचान नहीं की गई। इसमें अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।

आयुष्मान सोसायटी में क्लेम निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने मामले को संदिग्ध मानते हुए मंजीत का कार्ड तत्काल प्रभाव से ब्लॉक कर दिया है। वहीं, अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस बिष्ट की तरफ से कोतवाली पुलिस को आरोपी मंजीत के खिलाफ तहरीर दे दी गई है।

हंगामे के दौरान सीने में दर्द की शिकायत के बाद आरोपी मंजीत को अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती किया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने गफलत में उसे वहां से घर भेज दिया। प्रभारी एमएस डॉ. नितिन शर्मा ने स्पष्ट किया है कि पूरे प्रकरण और इसमें शामिल कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

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