---Advertisement---

NCAP रैंकिंग में देश के टॉप 15 शहरों में देहरादून, 12वां स्थान पाकर बनाया नया रिकॉर्ड

---Advertisement---

दून हॉराइज़न, देहरादून (07 सितंबर): दून घाटी की आबोहवा को सांस लेने लायक बनाए रखने की कोशिशों के बीच नगर निगम देहरादून के खाते में बड़ी राष्ट्रीय कामयाबी दर्ज हुई है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme) के ताजा मूल्यांकन में देहरादून ने देशभर में 12वीं रैंक हासिल कर अपनी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज कराया है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के बैंकों में पड़े 550 करोड़ रुपये लावारिस, वारिसों की तलाश में जुटा प्रशासन

सोमवार को नगर निगम परिसर में स्वच्छ वायु दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य कार्यक्रम में महापौर सौरभ थपलियाल और नगर निगम प्रशासन ने इस उपलब्धि को साझा किया। साथ ही शहर के स्कूली बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मंच से पुरस्कृत किया गया।

धोरण बना राज्य का मॉडल वार्ड, कचरा ट्रांसफर स्टेशन ने बदली सूरत

इस पूरे अभियान में सबसे बड़ा स्थानीय आकर्षण वार्ड संख्या 05 (धोरण) रहा। इसे उत्तराखंड शासन स्तर पर राज्य का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया है। धोरण में सड़कों और पैदल रास्तों की वैज्ञानिक पेविंग (interlocking paving) से उड़ने वाली धूल में भारी कमी आई। इसके अलावा, घर-घर से निकलने वाले कूड़े के लिए विकेंद्रीकृत ट्रांसफर स्टेशन और सघन ग्रीन बेल्ट विकसित करने के मॉडल ने इसे बाकी वार्डों से मीलों आगे खड़ा कर दिया।

सड़क किनारे उड़ती धूल सीधे तौर पर पार्टिकुलेट मैटर (PM10) को खतरनाक स्तर तक बढ़ा देती है। धोरण में कच्चे किनारों को पूरी तरह पक्का कर और खाली पैच पर हरियाली लगाकर वायु गुणवत्ता सूचकांक सुधारने का जो खाका खींचा गया, निगम अब उसे शहर के बाकी 99 वार्डों में भी लागू करने की तैयारी में है।

चित्रकला से लेकर कठपुतली शो, बच्चों ने समझा PM 2.5 का खतरा

नगर निगम परिसर में सुबह से ही स्कूली बच्चों की चहल-पहल रही। गैर-सरकारी संगठनों और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में सिर्फ औपचारिक भाषण नहीं हुए, बल्कि पोस्टर मेकिंग, क्विज, वाद-विवाद, नुक्कड़ नाटक और पारंपरिक कठपुतली शो के जरिए वायु प्रदूषण के वैज्ञानिक पहलुओं को समझाया गया। बच्चों को यह सरल भाषा में बताया गया कि कैसे सूक्ष्म कण यानी PM 2.5 फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर खून में घुल जाते हैं और किस तरह सूखी पत्तियों या प्लास्टिक कचरे को जलाना पूरी कॉलोनी की हवा में जहर घोल देता है।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए महापौर ने स्पष्ट किया कि देहरादून को केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर स्वच्छ रखना होगा। इसके लिए घरों में ही गीला और सूखा कचरा अलग-अलग (Source Segregation) करना अनिवार्य शर्त है।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद: देहरादून में कांग्रेस का हल्ला बोल, सीएम आवास कूच पर उतरी भारी भीड़

शहर में सड़कों की मशीनीकृत वैक्यूम सफाई (Mechanical Road Sweepers) और प्रमुख चौराहों पर एंटी-स्मॉग गन का नियमित छिड़काव अब नगर निगम की दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि आने वाले सर्दियों के महीनों में घाटी में स्मॉग का पहरा न जमने पाए।

Join WhatsApp

Join Now
---Advertisement---

Leave a Comment