देहरादून, 26 मई (दून हॉराइज़न)। चारधाम यात्रा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच बदरीनाथ और केदारनाथ यात्रा रूट पर पेट्रोल-डीजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि चमोली जिला प्रशासन को ईंधन की राशनिंग लागू करनी पड़ी है।
लगातार बढ़ती कीमतों के कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। इससे चारधाम यात्रा पर आ रहे तीर्थयात्रियों पर महंगाई और ईंधन की किल्लत की दोहरी मार पड़ रही है।
बदरीनाथ रूट पर तेल की लिमिट तय
चमोली जिले में प्रशासन ने चारपहिया वाहनों के लिए एक बार में अधिकतम 1000 रुपये का तेल देने की सीमा निर्धारित कर दी है। बदरीनाथ स्थित जीएमवीएन पेट्रोल पंप पर अब यात्रियों को केवल 800 रुपये का पेट्रोल और 1000 रुपये का डीजल ही दिया जा रहा है।
पंप सूखे, यात्रियों का हंगामा
ईंधन की कमी के कारण ज्योतिर्मठ, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और पीपलकोटी में यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। श्रीनगर शहर के पांच में से चार पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म हो चुका है।
ज्योतिर्मठ के एकमात्र पंप पर तेल न मिलने से नाराज यात्रियों ने पुलिस के सामने जमकर नारेबाजी की। पर्वतीय मार्गों पर पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
क्यों गहराया संकट?
आपूर्ति विभाग के मुताबिक, रविवार को तेल के टैंकर न पहुंच पाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। प्रशासन का कहना है कि भुगतान और आपूर्ति व्यवस्था में हालिया बदलाव भी इस किल्लत की वजह बने हैं। चमोली प्रशासन ने यात्रियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और अनावश्यक रूप से ईंधन का भंडारण न करने की अपील की है।
11 दिन में चौथी बार बढ़े दाम
पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल कंपनियों ने कीमतों में फिर इजाफा किया है। 15 मई से अब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है।
देहरादून में पेट्रोल 100.50 रुपये और डीजल 95.90 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। हरिद्वार को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में पेट्रोल का दाम 100 रुपये के पार जा चुका है।
600 करोड़ का रोजाना घाटा
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि लगातार मूल्य वृद्धि के बावजूद तेल कंपनियों को रोजाना करीब 600 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आने वाले दिनों में डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर फल, सब्जी, दूध और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर पड़ेगा। इसके अलावा ऑटो, टैक्सी, बस किराए और ई-कॉमर्स डिलीवरी शुल्क में भी बढ़ोतरी की संभावना है।









