दून हॉराइज़न, देहरादून (15 सितंबर): उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC Paper Leak) के बहुचर्चित 2016 वीपीडीओ भर्ती मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने प्रदेश के सियासी पारे को गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लंबे समय तक ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने छापा मारकर नकदी और आभूषण समेत 1.28 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की।
इस कार्रवाई के बाद चौतरफा घिरे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक लंबी भावुक पोस्ट लिखकर अपनी सरकार के समय हुई ‘एक बड़ी चूक’ को स्वीकार किया। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार को चुनौती दी कि वह उनके समूचे कार्यकाल की जांच के लिए आयोग गठित कर दे।
32 लाख नकद, सोने के सिक्के और लग्जरी घड़ियां जब्त
जांच एजेंसी के अनुसार चंदन सिंह जीना 2014 से 2017 के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कार्याधिकारी पद पर तैनात थे। राजधानी देहरादून में उनके परिसरों पर हुई तलाशी के दौरान अफसरों को 32 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी मिली। इसके अतिरिक्त 200.5 ग्राम वजनी 13 सोने के सिक्के, सात सोने की चेन और रोलेक्स, राडो, टिसोट जैसी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की 12 लग्जरी घड़ियां बरामद की गईं। परिजनों के बैंक खातों में जमा 52.16 लाख रुपये भी फ्रीज कर दिए गए हैं। एजेंसी का मानना है कि सरकारी पद का अनुचित लाभ उठाकर अज्ञात स्रोतों से नकदी जुटाई गई, जिसका वास्तविक आय से कोई मेल नहीं बैठता।
‘UKSSSC अध्यक्ष की नियुक्ति मेरी भूल थी’ — हरीश रावत
इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि उनके मुख्यमंत्रित्व काल में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की जो तैनाती की गई, वह व्यक्ति पद की गरिमा और शुचिता कायम नहीं रख सका। रावत के शब्दों में—”यह मुझसे हुई एक प्रशासनिक चूक थी, जिसके लिए मैं पहले भी जनता से क्षमा मांग चुका हूं और आज फिर माफी मांग रहा हूं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि चंदन जीना वर्ष 1991 से उनके साथ जुड़े रहे हैं और उन पर लगाए जा रहे आरोपों के जरिए असल में उन्हें राजनीतिक रूप से लांछित करने का सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है।
42 हजार नियुक्तियों का हवाला देकर जांच की चुनौती
राजनीतिक हमलों का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आंकड़े गिनाए। उन्होंने दावा किया कि उनके तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक युवाओं को निष्पक्ष नौकरियां मिलीं और 18 हजार नई भर्तियों के अधियाचन जारी किए गए थे। अगर किसी को उनके कार्यकाल के फैसलों में संदेह है, तो सरकार को आयोग बनाकर पूरी जांच करानी चाहिए।
गौरतलब है कि 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO Exam) परीक्षा में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और व्यापक अनियमितताओं की पुष्टि के बाद यह मामला पहले एसटीएफ और अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से ईडी के पास पहुंचा है।









