किसान नेता नवदीप जलबेड़ा: पुलिस रिमांड में कई खुलासे, हथियार बरामद

किसान आंदोलन में युवाओं को लाने में अहम भूमिका निभाने वाले किसान नेता नवदीप जलबेड़ा को सोमवार को कोर्ट में पेश किया। यहां से उसे 14 न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मगर तीन दिनों में पुलिस रिमांड में नवदीप ने कई राज खाेले हैं।

इसमें पुलिस को सबसे पहले तो करीब 25 से 30 लोगों को चिह्नित करने में सफलता मिली है, जोकि किसान आंदोलन के दौरान उपद्रव में शामिल थे। इन चिह्नित लाेगों में किसान आंदोलन को शंभू बॉर्डर पर चला रहे किसान नेता भी शामिल हैं। इसके साथ ही पत्थर और लाठी चलाने वालों की भी पहचान हुई है।

पुलिस नवदीप को साथ लेकर पंजाब भी गई थी।

जहां से नवदीप की निशानदेही पर लाठियां, केन शील्ड और अन्य हथियार भी बरामद हुए हैं। इनका प्रयोग उपद्रव के दौरान किया गया था। गौरतलब है कि नवदीप व उसके साथी को मोहाली एयरपोर्ट से पकड़ने के बाद सीआईए वन अंबाला लेकर आई थी। जहां पर दो दिन की रिमांड में गहन पूछताछ की गई। इसके बाद पुलिस ने एक दिन भी और रिमांड बढ़ाने को कोर्ट से अपील की।

इससे कि नवदीप से विदेशी फंडिंग के बारे में पूजा जा सके। ऐसे में सोमवार को रिमांड का आखिरी दिन समाप्त हो गया। ऐसे में दोपहर को सबसे पहले कड़ी सुरक्षा के बीच नवदीप को अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल लाया गया। यहां उसका मेडिकल कराया गया इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे सीधा जेल भेज दिया।

नवदीप ने पूछताछ में दिया साथ

नवदीप अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से लगातार सरकार व पुलिस प्रशासन को घेरता रहा है। ऐसे में पुलिस को उम्मीद थी कि नवदीप जलबेड़ा पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं करेगा। मगर पुलिस विभाग के सूत्रों की मानें तो नवदीप ने पूछताछ में सहयोग किया। उसकी निशानदेही से सभी सामान को बरामद भी किया गया। हालांकि तलवार आदि को अभी तक बरामद नहीं किया गया है।

इन 21 नेताओं पर केस दर्ज

पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में नवदीप ही नहीं बल्कि भाकियू शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहड़ी, संयुक्त किसान मोर्चा अराजनीतिक से सरवन सिंह पंधेर, सुखचैन बड़ोग पंजाब, बलजिंदर सिंह चुड़ियाला, जय सिंह जलबेड़ा, गुरकीरत शाहपुर सहित अन्य 21 किसान नेताओं के नाम हैं। एफआईआर में बताया गया था कि उपायुक्त ने किसान आंदोलन के चलते धारा 144 के आदेश दिए थे।

इसके बावजूद शंभू बॉर्डर पर किसानों का हुजूम इन किसान नेताओं ने एकत्रित कर लिया। पुलिस के समझाने पर भी नहीं माने और हिंसा का प्रयोग करते हुए बेरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान गुलेल, कंचे, डंडे, तलवारों और बख्तरबंद ट्रेक्टरों का प्रयोग किया गया। इस कार्य को कर किसान नेताओं ने लोगों की जान को जोखिम में डाला। नतीजा आंदोलन उग्र हो गया और कई किसान और पुलिस अधिकारी व फोर्स के जवान घायल हो गए। यह मुकदमा धारा भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 379 बी के तहत की गई थी। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *