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आदि कैलाश यात्रा पर इंदौर के युवक की मौत, सांस फूलने के बाद अस्पताल में तोड़ा दम

पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा के दौरान इंदौर के तिलक शर्मा की सांस फूलने से मौत हो गई। इस सीजन में यह तीसरी जानलेवा घटना है। प्रशासन ने पोस्टमार्टम कराया।

पिथौरागढ़ (30 अक्टूबर) : भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा इस सीजन में श्रद्धालुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर से अपने दोस्तों के साथ दर्शन करने आए 24 वर्षीय युवक तिलक शर्मा की ऑक्सीजन की कमी और गंभीर सांस संकट के चलते मौत हो गई।

यात्रा मार्ग पर अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद युवक को सेना और प्रशासन के सहयोग से गुंजी स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उसकी जान नहीं बच सकी। इस दुखद हादसे के साथ ही मौजूदा यात्रा सीजन में आदि कैलाश मार्ग पर जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर अब 3 हो गई है, जिसने उच्च हिमालयी यात्राओं में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आदि कैलाश यात्रा में सीजन की तीसरी मौत

मृतक की शिनाख्त इंदौर (मध्य प्रदेश) के नगर निगम रोड स्थित 24 शटर गली निवासी तिलक शर्मा (पुत्र मनोज शर्मा) के रूप में हुई है। तिलक अपने दोस्तों के एक दल के साथ आदि कैलाश के दर्शन के लिए निकला था। दुर्गम चढ़ाई और अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाके में पहुंचते ही उसे अचानक बेचैनी और सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी।

साथियों ने आनन-फानन में स्थानीय लोगों की मदद से उसे गुंजी अस्पताल पहुंचाया। गुंजी में तैनात मेडिकल टीम ने युवक को ऑक्सीजन सपोर्ट देकर स्थिर करने का प्रयास किया, लेकिन फेफड़ों में संक्रमण और ऑक्सीजन स्तर में अचानक आई तेज गिरावट के कारण उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही दल में शामिल अन्य साथियों में चीख-पुकार मच गई।

हाई एल्टीट्यूड पर ऑक्सीजन संकट और मेडिकल जांच

समुद्र तल से करीब 5,945 मीटर (लगभग 20,000 फीट) की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश क्षेत्र में वायुदाब और ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शरीर को मौसम के अनुकूल (एक्लिमेटाइज) किए बिना तेजी से चढ़ाई करने पर हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा (HAPE) और दिल का दौरा पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

इस यात्रा सीजन में यह कोई पहली अनहोनी नहीं है। इससे पहले श्रद्धालु पीएम सुधीर की भी यात्रा से वापसी के दौरान धारचूला पहुंचने पर अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो चुकी है। तिब्बत स्थित मुख्य कैलाश के विपरीत भारत की सीमा में होने के कारण आदि कैलाश के लिए वीजा की जरूरत नहीं होती और केवल इनर लाइन परमिट (ILP) जारी किया जाता है, जिसके चलते कई यात्री बिना किसी कड़े मेडिकल फिटनेस टेस्ट के सीधे 14 हजार फीट से ऊपर पहुंच रहे हैं।

शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराएगा धारचूला प्रशासन

घटना के बाद आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में मृतक के शव को गुंजी से नीचे धारचूला लाया गया, जहां उसे उप-जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। धारचूला के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आशीष जोशी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही राजस्व और पुलिस टीम को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। पुलिस द्वारा शव का पंचनामा भरने के बाद डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जाएगा, ताकि मौत के स्पष्ट मेडिकल कारणों का आधिकारिक ब्योरा सामने आ सके।

कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर को इंदौर से आ रहे परिजनों के सुपुर्द किया जाएगा। वहीं, प्रशासन ने उच्च हिमालयी मार्ग पर जा रहे अन्य तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे सीने में दर्द, सिरदर्द या सांस लेने में जरा सी भी परेशानी होने पर यात्रा तुरंत रोककर नजदीकी मेडिकल कैंप में जांच कराएं।

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