दून हॉराइज़न, देहरादून (12 सितंबर): उत्तराखंड इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड यानी यूआईआईडीबी (UIIDB) को लेकर छिड़ी सियासी रार अब पूरी तरह आक्रामक मोड़ पर पहुंच गई है। विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा सात हजार बीघा सरकारी जमीन निजी कंपनियों को सौंपे जाने के दावों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने आधिकारिक बयान जारी कर साफ किया कि बोर्ड के पास वर्तमान में महज 18 हेक्टेयर जमीन है।
ऐसे में हजारों बीघा जमीन बेचने का आरोप जनता को बरगलाने की नाकाम कोशिश भर है। भट्ट ने दो टूक कहा कि धामी सरकार का मकसद राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (Uttarakhand GDP) को दोगुना करना है, जिसके लिए वर्षों से अनुपयोगी पड़ी जमीनों को व्यवस्थित आर्थिक प्रबंधन के दायरे में लाया जा रहा है।
जमीन बेची नहीं जा रही, लीज मॉडल पर टिका है निवेश का ढांचा
सरकारी भू-संपत्तियों के निजीकरण के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा नेतृत्व ने नीतिगत स्थिति स्पष्ट की है। प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक पर्वतीय राज्य में खाली पड़ी जमीनें न तो स्थानीय युवाओं को रोजगार दे सकती हैं और न ही उनसे कोई राजस्व मिलता है।
तय नियमों और पर्यावरणीय मानकों के दायरे में केवल लीज आधारित व्यवस्था (Leasehold Model) के जरिए निजी पूंजी को आकर्षित किया जा रहा है। यानी जमीन की एक भी इंच मिल्कियत निजी हाथों में नहीं जाएगी—मालिकाना हक शत-प्रतिशत राज्य सरकार के पास ही महफूज रहेगा। इस व्यवस्था से पर्यटन, आयुष व वेलनेस, स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में अधोसंरचना खड़ी करने की तैयारी है, ताकि स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।
छरबा एजुकेशन सिटी: ₹1000 करोड़ की पूंजी और उच्च शिक्षा के अवसर
सहसपुर ब्लॉक के छरबा क्षेत्र में प्रस्तावित एजुकेशन सिटी परियोजना का बचाव करते हुए पार्टी ने तथ्यात्मक ब्योरा सामने रखा। इस प्रोजेक्ट में करीब 1,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश जमीन पर उतरना है।
परियोजना के पहले चरण में 3,000 से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अवसर तैयार होंगे। इसमें रिसर्च क्लस्टर, कौशल विकास केंद्र और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े आधुनिक पाठ्यक्रम शामिल किए जाएंगे। चयन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने बताया कि पारदर्शी व्यवस्था के तहत यूपीईएस (UPES) जैसी प्रतिष्ठित संस्था को इस कार्य के लिए तय नियमों के मुताबिक चुना गया है। इससे क्षेत्रीय युवाओं को सीधे रोजगार के अलावा सहायक उद्यमों के जरिए रोजी-रोटी के नए रास्ते खुलेंगे।
पुराने घपलों की याद: आईटी पार्क और सिडकुल के फैसलों पर घेरा
विपक्ष की नीयत पर सवाल दागते हुए महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के पुराने कार्यकालों का लेखा-जोखा खोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2006 में सिडकुल के मार्फत सुपरटेक और प्लेनेट इंफ्रा को बेहद कम दरों पर जमीनों की बंदरबांट की गई थी।
इतना ही नहीं, देहरादून आईटी पार्क की जिस जमीन को शुद्ध रूप से सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए आरक्षित किया गया था, उसे 2013 में बिल्डरों के हवाले कर दिया गया। कैग (CAG) की ऑडिट आपत्तियों का हवाला देते हुए भाजपा ने पूछा कि सिटी पार्क लैंडयूज को बिना विधिवत शुल्क जमा कराए किसने बदला?
कांग्रेस आरोप पत्र समिति के अध्यक्ष करन माहरा द्वारा रियल एस्टेट से जुड़ी सिक्का कंपनी को जमीन मिलने की बात स्वीकारने पर तंज कसते हुए भट्ट ने कहा कि विपक्ष को सवाल पूछने से पहले अपने ही दौर के फैसलों का जवाब देना चाहिए।
उत्तराखंड के विकास के लिए उद्योगों को जमीन देना राज्य की स्वाभाविक जिम्मेदारी है—चाहे वह एनडी तिवारी के दौर में सिडकुल का गठन रहा हो या फिर मौजूदा दौर में देश भर के भीतर सेमीकंडक्टर और डाटा सेंटर परियोजनाओं का विस्तार।









