देहरादून, 12 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Kedarnath VIP Bills : केदारनाथ धाम में वीआईपी अतिथियों के आवास और भोजन का खर्च मंदिर समिति के कोष से चुकाया गया। चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में इन वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तरह पुष्टि हो गई है। उत्तराखंड शासन के पर्यटन एवं धर्मस्व विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक्शन लिया है।
बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सरकार ने रिपोर्ट का संज्ञान लिया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधे नियमानुसार कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।
एक आरटीआई से निकले दस्तावेजों ने इस पूरे घटनाक्रम की पोल खोली। भाजपा प्रदेश सचिव नेहा जोशी के नाम पर लगभग 60 हजार रुपए का खर्च मंदिर समिति के खाते से कटा। केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर भी 37 हजार रुपए से अधिक के बिल का भुगतान मंदिर कोष से किया गया।
इन दोनों नेताओं ने शुरुआत में आरोपों को सीधे तौर पर खारिज किया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि अपनी यात्रा का निजी खर्च उन्होंने स्वयं उठाया था। जांच समिति ने विभिन्न बिलों और भुगतान प्रक्रियाओं का परीक्षण कर इन दावों के विपरीत मंदिर समिति द्वारा बिल चुकाए जाने की बात पकड़ी।
25 जून 2026 को उत्तराखंड शासन के उप सचिव अनिल कुमार पांडे ने एक सख्त पत्र बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी को भेजा। मंदिर कोष से बिना सक्षम स्तर की स्वीकृति के एडवांस धनराशि निकालना सीधे वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में रखा गया है।
शासन के पत्र में तत्कालीन व्यवस्थापक केदारनाथ और तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी केदारनाथ की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध पाई गई है। तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी, बदरी-केदार मंदिर समिति को भी इस गड़बड़ी के घेरे में लिया गया है।
सरकार ने बीकेटीसी अधिनियम 1939 और उसकी नियमावलियों के तहत इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तय कर दी है। प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ी स्वीकार कर ली गई है और अब यह मामला केवल राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं रहा।
श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि के इस दुरुपयोग पर विभिन्न धार्मिक संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दोषी अधिकारियों पर कड़े कदम उठाने की मांग रखी है।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भविष्य में मंदिर कोष से जुड़े मामलों में ऐसी किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता रोकने का आश्वासन दिया है। कार्यप्रणाली में बदलाव कर वीआईपी खर्चों पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है।









