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Madrasa Investigation : मदरसों में व्हाट्सएप पर फोटो मांगते ही खुली पोल, 12 हजार बच्चे रातों-रात गायब

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हरिद्वार, 30 मई (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में मदरसों के अंदर मिड-डे मील (एमडीएम) के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े की बू आ रही है। प्रशासन ने जैसे ही जांच का शिकंजा कसा, जिले के 131 मदरसों के रिकॉर्ड से अचानक 12 हजार छात्र गायब हो गए। आशंका जताई जा रही है कि मिड-डे मील का सरकारी पैसा हड़पने के लिए इन छात्रों का कागजों पर फर्जी पंजीकरण दिखाया गया था।

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने तक जिले के 131 मदरसों में कुल 31 हजार छात्र पंजीकृत थे। लेकिन जांच की सुगबुगाहट के बीच अप्रैल में यह संख्या तेजी से गिरकर 19 हजार पर आ गई। एक ही महीने में 12 हजार छात्रों का कम होना सीधे तौर पर सरकारी फंड के गबन की ओर इशारा कर रहा है।

फर्जीवाड़े की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब जिलाधिकारी (DM) के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने लक्सर तहसील क्षेत्र के मदरसों का औचक निरीक्षण किया। इस जांच में 23 मदरसों में भारी अनियमितताएं पाई गईं, जिसके तुरंत बाद उनके मिड-डे मील और अन्य सरकारी फंड पर रोक लगा दी गई।

सख्ती का असर यह हुआ कि 10 मदरसा संचालकों ने खुद ही अपने संस्थान बंद करने का आवेदन दे दिया। यहां छात्रों की वास्तविक संख्या बेहद कम थी, लेकिन भुगतान पूरे बच्चों का लिया जा रहा था।

इस बीच बेसिक शिक्षा विभाग ने निगरानी का एक नया तरीका अपनाया, जिसने फर्जीवाड़े को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। डीईओ (बेसिक) अमित कुमार चंद ने अप्रैल में रुड़की के मदरसों के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। सभी संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए थे कि वे रोजाना मिड-डे मील बनाने और बच्चों के खाना खाते हुए फोटो-वीडियो इस ग्रुप में अपलोड करेंगे।

पारदर्शी व्यवस्था लागू होते ही 11 मदरसों ने हाथ खड़े कर दिए और मिड-डे मील बंद करने का आवेदन दे दिया। पूर्व में भी जिले के 11 मदरसों का एमडीएम इसी तरह बंद कराया गया था। इन संस्थानों में ही करीब चार हजार बच्चों का फर्जी पंजीकरण दिखाया गया था।

डीईओ बेसिक अमित कुमार चंद ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है। वहीं, छात्रों की संख्या में इतनी बड़ी और संदिग्ध गिरावट को देखते हुए जिलाधिकारी ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है।

एसडीएम (SDM) की अध्यक्षता वाली इस चार सदस्यीय टीम में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया है। यह टीम पूरे जिले में फर्जी छात्रों के पंजीकरण और मिड-डे मील के गबन की बारीकी से जांच करेगी।

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