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बदरीनाथ धाम में बड़ा हादसा, तप्त कुंड में स्नान के दौरान राजस्थान की दो महिला श्रद्धालुओं की मौत

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दून हॉराइज़न, चमोली/देहरादून (11 सितंबर): बदरीनाथ धाम में शुक्रवार तड़के दर्शन की तैयारी के बीच उस वक्त मातम पसर गया, जब मंदिर परिसर स्थित महिला तप्त कुंड में स्नान कर रहीं राजस्थान की दो बुजुर्ग तीर्थयात्रियों ने दम तोड़ दिया। दोनों महिलाएं रिश्ते में बहनें थीं और भीलवाड़ा से श्रीमद्भागवत कथा के अनुष्ठान में शामिल होने चारधाम पहुंची थीं।

108 डुबकी का संकल्प और कुंड में मची चीख-पुकार

शुक्रवार सुबह करीब 4:30 बजे भीलवाड़ा का यह तीर्थयात्री दल मुख्य मंदिर में दर्शन के लिए निकला था। दल के पुरुष सदस्य अमर चंद्र शर्मा पुरुषों के लिए बने अलग कुंड में चले गए, जबकि उनकी पत्नी रामू देवी (71) और उनकी बहन प्रेम देवी (63) अन्य साथी महिलाओं भगवती और सोनी के साथ महिला तप्त कुंड (Hot Water Spring) में उतरीं।

साथी महिलाओं के मुताबिक, दोनों बहनों ने धार्मिक संकल्प के तहत ईश्वर का नाम लेते हुए लगातार 108 बार डुबकी लगाना शुरू किया।

पानी से बाहर निकले बिना एक के बाद एक डुबकी लगाने के दौरान अचानक दोनों अचेत होकर पानी में गिर पड़ीं। कुंड में मौजूद साथी महिलाओं ने शोर मचाया और आसपास खड़े लोगों की मदद से आनन-फानन दोनों को गर्म पानी से बाहर निकाला। मौके पर पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) देने का प्रयास किया, मगर शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। इसके बाद उन्हें तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदरीनाथ पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।

गर्म पानी, सल्फर की भाप और ऑक्सीजन की भारी कमी बनी वजह

बदरीनाथ के थाना प्रभारी महादेव उनियाल के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला अत्यधिक गर्म पानी में देर तक रहने और लगातार सिर डुबोए रखने से ऑक्सीजन की भारी कमी (Hypoxia) का प्रतीत हो रहा है।

तप्त कुंड का पानी प्राकृतिक रूप से लगभग 45 से 55 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रहता है। इसमें गंधक (सल्फर) की मात्रा काफी अधिक होती है।

समुद्र तल से 10,279 फीट की ऊंचाई पर वैसे ही हवा का दबाव कम होता है। ऐसे में तेज भाप और सल्फर से भरे वातावरण में सांस रोके रखकर लगातार डुबकी लगाने से बुजुर्ग शरीर पर कार्डियोवैस्कुलर दबाव अचानक बढ़ जाता है। चमोली पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम व अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए भेज दिया है।

चारधाम में बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए कड़े सबक

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलवाड़ा से यह जत्था 4 सितंबर को बदरीनाथ पहुंचा था और कथा श्रवण के बाद आज उनका मुख्य दर्शन था। लेकिन परंपरा और हठयोग जैसे संकल्प के आगे शरीर ने साथ छोड़ दिया। स्थानीय प्रशासन और डॉक्टरों ने पूर्व में भी आगाह किया है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के श्रद्धालु तप्त कुंड के अत्यधिक गर्म पानी में 3 से 5 मिनट से ज्यादा न रुकें और बार-बार गहरे पानी में सांस रोककर डुबकी लगाने से बचें।

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