देहरादून, 05 जून 2026 (दून हॉराइज़न)। विश्व पर्यावरण दिवस पर राजधानी देहरादून के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने वृहद स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया है। गुरुवार को सहस्त्रधारा रोड स्थित नालापानी क्षेत्र में नदी किनारे खाली पड़ी भूमि पर 300 से अधिक पौधे रोपे गए। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक दिन का प्रतीकात्मक अभियान नहीं है, बल्कि इस खाली जमीन को भविष्य में एक पूर्ण विकसित सार्वजनिक ग्रीन पार्क का रूप दिया जाएगा।
गढ़वाल ग्रीनर्स और स्थानीय लोगों की भागीदारी
रायपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत युवा कल्याण कार्यालय के समीप आयोजित इस कार्यक्रम में फलदार, छायादार और औषधीय प्रजाति के पौधे लगाए गए। इस अभियान में एमडीडीए के अधिकारियों के साथ 127 इन्फैंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) गढ़वाल राइफल्स के जवानों ने भी अहम भूमिका निभाई। ‘गढ़वाल ग्रीनर्स’ के नाम से पहचाने जाने वाले इन जवानों, जेसीओ और अधिकारियों ने पौधे लगाने के साथ ही उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल में हिस्सा लिया।
संरक्षण पर जोर और ग्रीन पार्क का प्लान
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘हरित उत्तराखंड-स्वच्छ उत्तराखंड’ विजन के अनुरूप यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पेड़ बनने तक उनका संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण है। बंशीधर तिवारी ने जानकारी दी कि जिस स्थल पर ये पौधे लगाए गए हैं, उसे एक आधुनिक हरित पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि लगाए गए पौधों के रखरखाव और सुरक्षा की प्रभावी व्यवस्था प्राधिकरण द्वारा की जा रही है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम जनमानस की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया।
शहर के सुंदरीकरण पर एमडीडीए का फोकस
प्राधिकरण अब भवन निर्माण और शहरी विकास के साथ-साथ शहर के पर्यावरणीय संतुलन पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। राजधानी के प्रमुख मार्गों के डिवाइडरों पर सजावटी पौधे लगाने से लेकर नए हरित पार्क और ग्रीन बेल्ट विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। देहरादून में बढ़ते शहरीकरण के बीच, खाली पड़ी जमीनों को हरित क्षेत्रों में बदलने की इस प्रशासनिक पहल से शहर के प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलने की उम्मीद है।









