दून हॉराइज़न, देहरादून (14 सितंबर): आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन सियासी बिसात पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पकड़ बेहद मजबूत नजर आ रही है। एक ताजा जनमत सर्वेक्षण (Political Survey) के अनुसार, यदि आज की तारीख में उत्तराखंड में चुनाव हो जाएं, तो 70 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी 54 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज कर सकती है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार विरोधी लहर (Anti-Incumbency) के पारंपरिक रुझान के उलट जनता का विश्वास मौजूदा नेतृत्व पर और गहराया है।
याद दिला दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी का मिथक तोड़ा था। अब 54 सीटों का नया अनुमान दिखाता है कि पार्टी अपनी स्थिति में सात सीटों का और इजाफा कर सकती है।
महिला आरक्षण और देवभूमि की पहचान पर जबरदस्त जनसमर्थन
सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश लोगों ने धामी कैबिनेट के नीतिगत फैसलों पर स्पष्ट सहमति जताई। उत्तराखंड में स्थानीय महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण देने के कानून पर 88 प्रतिशत जनता ने पूर्ण समर्थन दिया, जबकि इसका पूरी तरह विरोध करने वालों की संख्या महज पांच फीसदी रही। वहीं, राज्य की जनसांख्यिकी और सांस्कृतिक पहचान यानी देवभूमि के मूल स्वरूप को अक्षुण्ण रखने के प्रशासनिक अभियानों को 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सही ठहराया।
धर्मनगरी और पहाड़ी अंचलों में जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त पर रोक और सत्यापन अभियान को स्थानीय आबादी का सीधा जुड़ाव मिला है।
सामाजिक समीकरणों में हर वर्ग ने स्वीकारा नेतृत्व
चुनावी राजनीति में जातियों का अंकगणित हमेशा अहम होता है। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि धामी सरकार की अपील किसी एक विशेष समुदाय तक सीमित नहीं रही। आंकड़ों पर नजर डालें:
- बनिया/कायस्थ वर्ग: 57.3%
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 50.6%
- पंजाबी-सिख समुदाय: 49.7%
- ब्राह्मण वर्ग: 46.3%
- राजपूत वर्ग: 46.1%
- अनुसूचित जाति (SC): 45.3%
पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के प्रमुख सामाजिक घटकों के बीच 45 प्रतिशत से अधिक का स्थिर समर्थन यह दर्शाता है कि सत्ता विरोधी लहर की धार फिलहाल कुंद है।
युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर पीढ़ी में पैठ
उम्र के हिसाब से किए गए विश्लेषण में सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई कि उम्र बढ़ने के साथ सरकार के प्रति समर्थन का अनुपात लगातार बढ़ा है। 18 से 25 साल के पहली बार वोट डालने वाले 37.8 फीसदी युवाओं ने सरकार को पसंद किया, तो 26 से 35 आयु वर्ग में यह आंकड़ा 43 फीसदी रहा। वहीं, 36 से 50 वर्ष में 46.8 फीसदी, 51 से 60 वर्ष में 50.3 फीसदी और 60 साल से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों में 51.8 फीसदी लोगों ने धामी सरकार के कामकाज पर भरोसा जताया।
दरअसल, राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने और समान नागरिक संहिता (UCC) पारित किए जाने के बाद से शासन की छवि पारदर्शी निर्णय लेने वाली बनी है। अगर यह सियासी मिजाज 2027 तक कायम रहा, तो विपक्षी दलों के लिए सत्ता वापसी की राह बेहद कठिन साबित होने वाली है।









