देहरादून, 26 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election 2027) को लेकर कांग्रेस संगठन ने अभी से जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। इस बार चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशियों के चयन के लिए पार्टी ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है।
कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनाव में केवल पैरवी, सिफारिश या पुराने रसूख के दम पर टिकट हासिल नहीं किया जा सकेगा। उम्मीदवारों की जमीनी हकीकत परखने के लिए पार्टी ने भाजपा की रणनीति पर चलते हुए तीन स्तर का गोपनीय सर्वे शुरू कराया है।
तीन चरणों में परखी जाएगी दावेदारों की जमीनी ताकत
इस त्रिस्तरीय सर्वे के तहत पहले चरण का काम शुरू हो चुका है, जो मुख्य रूप से राज्य की जनता के बीच कांग्रेस की वर्तमान स्थिति, सत्ता विरोधी माहौल और स्थानीय मुद्दों को समझने पर केंद्रित है। इसके बाद होने वाले बाकी दो चरणों के सर्वे सीधे तौर पर टिकट के दावेदारों और मौजूदा विधायकों पर आधारित होंगे। इनमें संभावित प्रत्याशियों की जनता के बीच लोकप्रियता, सांगठनिक क्षमता और चुनाव जीतने की क्षमता का कड़ा मूल्यांकन किया जाएगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस रणनीतिक कदम की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर राजनीतिक दल चुनाव से पहले अपनी जमीनी तैयारियों को पुख्ता करने के लिए सर्वे का सहारा लेता है। आगामी चुनाव में टिकट वितरण के दौरान इस गोपनीय सर्वे की रिपोर्ट सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास सत्ताधारी दल भाजपा के आंतरिक सर्वे के इनपुट भी पहुंचे हैं, जो कांग्रेस के पक्ष में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
जून के पहले हफ्ते में राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा
चुनावी अभियान को गति देने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जून के पहले सप्ताह में उत्तराखंड के दौरे पर आ सकते हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, राहुल गांधी गढ़वाल के पौड़ी में एक बड़ी जनसभा और स्थानीय लोगों के साथ संवाद करेंगे। इसके अलावा कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा में भी उनके एक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा जा सके।
गढ़वाल मंडल पर विशेष फोकस की वजह
पिछले चुनावी आंकड़ों को देखें तो कांग्रेस के लिए गढ़वाल मंडल हमेशा से कमजोर कड़ी रहा है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में गढ़वाल क्षेत्र के सात जिलों की कुल 41 सीटों में से कांग्रेस के खाते में महज 8 सीटें आई थीं, जिनमें से 5 सीटें अकेले हरिद्वार जिले की थीं। यानी शेष छह जिलों की 30 सीटों पर पार्टी सिर्फ 3 सीटें ही जीत सकी थी। इसके विपरीत कुमाऊं मंडल की 29 सीटों में से कांग्रेस को 11 सीटें मिली थीं, जो तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन था।
इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए कांग्रेस ने इस बार प्रदेश अध्यक्ष, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष जैसे अहम पदों पर गढ़वाल क्षेत्र के नेताओं को जिम्मेदारी दी है।
सत्ता में वापसी की बड़ी चुनौती
करीब एक दशक से उत्तराखंड की सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस के लिए साल 2027 का चुनाव करो या मरो की स्थिति जैसा है। जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ तीन सर्वे पूरे कर चुकी है, वहीं कांग्रेस भी इस बार किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। यही कारण है कि टिकट वितरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरी तरह पेशेवर और तथ्य-आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है।









