देहरादून, 26 मई (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में लगातार बढ़ते तापमान और कम होती नमी के चलते जंगलों में आग (Uttarakhand Forest Fire) लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 100 दिनों के भीतर राज्य भर में वनाग्नि की 392 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
फायर सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक 329 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो गया है। इससे बहुमूल्य वन संपदा के साथ-साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को भारी नुकसान पहुंचा है।
वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 फरवरी से शुरू हुए इस फायर सीजन में गढ़वाल मंडल सबसे अधिक प्रभावित रहा है। यहां अब तक आग की 284 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जबकि कुमाऊं मंडल में 74 और अन्य क्षेत्रों में 34 मामले दर्ज किए गए हैं।
मुख्य वन संरक्षक (कुमाऊं) डॉ. तेजस्विनी पाटिल ने बताया कि पिछली बारिश से कुमाऊं में कुछ राहत जरूर मिली थी और हरियाली भी लौटी है, लेकिन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
इस बीच, मौसम विभाग का पूर्वानुमान फौरी राहत की उम्मीद जगा रहा है। अगले दो दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य में बारिश की संभावना है। अगर बारिश होती है, तो वनाग्नि पर प्राकृतिक रूप से लगाम लग सकेगी।
नैनीताल और भीमताल में धधके जंगल, शरारती तत्वों पर शक
नैनीताल की मनोरा रेंज के बल्दियाखान में रविवार रात तेज हवाओं के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया। पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया। यहां किसी शरारती तत्व द्वारा आग लगाए जाने की आशंका जताई जा रही है। एसडीओ ममता चंद के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने लगातार मशक्कत कर आग पर काबू पा लिया है।
इसी तरह भीमताल के सोनगांव में भी सोमवार को आग भड़क उठी। ग्राम प्रधान मुकेश पलड़िया की सूचना पर ग्रामीणों और वन विभाग ने दो घंटे के संयुक्त अभियान के बाद आग बुझाई। ग्राम प्रधान ने भी अराजक तत्वों द्वारा जानबूझकर आग लगाने का शक जताया है।
रानीखेत में बड़ा हादसा टला
रानीखेत क्षेत्र के सड़ना, मजखाली और पन्याली में भी आग की नई घटनाएं सामने आई हैं। भिकियासैंण-जैनल मार्ग पर सड़ना के पास धधकते जंगल के बिल्कुल करीब एक घरेलू सामान से लदा लोडर अनियंत्रित होकर पलट गया।
गनीमत रही कि वाहन में सवार दोनों लोग सुरक्षित बच गए। समय रहते दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
उधर, अल्मोड़ा में पाण्डेखोला स्थित सीएमओ कार्यालय के पास और डीडीहाट के छनपट्टा तोक में भी तेज हवाओं के बीच जंगल धू-धू कर जल उठे। चम्पावत के बसान के जंगल में भी आग से बड़े पैमाने पर वनस्पति और वन्यजीवों के आवास नष्ट हो गए हैं। कड़ी मशक्कत के बाद इन स्थानों पर आग को नियंत्रित किया जा सका है।









