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Uttarakhand Weather Alert : किमाड़ी मार्ग पर लगातार गिर रहा मलबा, रास्ता खोलना बना बड़ा जोखिम

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देहरादून, 23 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Weather Alert 23 July : उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी हिस्सों में मानसून की बारिश आफत बनकर बरस रही है। पहाड़ों में जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के चलते कई प्रमुख मार्ग बाधित हो गए हैं, जिससे आम जनता की मुसीबतें बढ़ गई हैं।

राजधानी देहरादून में मौसम के दोहरे रूप देखने को मिल रहे हैं, जहां धूप और बारिश का दौर एक साथ बना हुआ है। बुधवार सुबह शहर के कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन उसके बाद तेज धूप खिलने से भयानक उमस पैदा हो गई।

उमस के कारण तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देहरादून का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन के सामान्य तापमान से पूरे दो डिग्री अधिक दर्ज किया गया है। वहीं शहर का न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने आने वाले समय के लिए चेतावनी जारी की है। उनके मुताबिक अगले 24 घंटे में पहाड़ी जिलों में अधिकांश जगहों पर और मैदानी इलाकों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और तेज बौछारें पड़ने के पूरे आसार बने हुए हैं।

मौसम विभाग ने देहरादून, बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। पर्वतीय इलाकों में गर्जन और बिजली चमकने के साथ ही बारिश के अति तीव्र दौर आने की गंभीर आशंका जताई गई है।

मसूरी और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से हालात खराब हैं। बुधवार सुबह मसूरी-दून मुख्य मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास अचानक पहाड़ी से भारी मलबा और विशालकाय पेड़ उखड़कर सड़क पर आ गिरा, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

घटना की जानकारी मिलते ही लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की टीम हरकत में आई। लोनिवि के अपर सहायक अभियंता प्रदीप सिंह शाही ने बताया कि रास्ते पर मलबा आने की खबर मिलते ही तत्काल दो जेसीबी मशीनों को मौके पर रवाना किया गया था।

जेसीबी मशीनों की मदद से कर्मचारियों ने लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सड़क से पेड़ और मलबा हटाकर रास्ता खाली कराया। दोपहर दो बजे के बाद इस मार्ग पर फंसे बड़े वाहनों की आवाजाही भी शुरू कराई जा सकी।

रास्ता खुलने के बावजूद यात्रियों को राहत पूरी तरह नहीं मिली है। पानीवाला बैंड के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही धंसा हुआ और क्षतिग्रस्त है, जिसके कारण एहतियात के तौर पर फिलहाल केवल वन-वे ट्रैफिक ही निकाला जा रहा है।

दूसरी तरफ किमाड़ी मार्ग भी पहाड़ी से भारी मलबा गिरने के कारण पूरी तरह से बंद हो गया है। लोनिवि के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक पहाड़ी से पत्थरों और मलबे का गिरना बंद नहीं होता, तब तक वहां रास्ता खोलने का काम शुरू करना मजदूरों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

किमाड़ी मार्ग के बंद होने से स्थानीय ग्रामीणों की चिंता बेहद बढ़ गई है। क्षेत्र के निवासी अनिल का कहना है कि अगर पहाड़ी से इसी रफ्तार से मलबा गिरता रहा तो रास्ता साफ होने में लंबा समय लग जाएगा, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाएगी।

देहरादून-मसूरी मार्ग बाधित होने का सबसे बड़ा असर सार्वजनिक परिवहन पर पड़ा है। दून से मसूरी जाने वाली रोडवेज की बसों का संचालन लगातार दूसरे दिन भी पूरी तरह बंद रहा, जिससे गंतव्य तक जाने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

बसें न चलने के कारण यात्रियों को मजबूरन प्राइवेट टैक्सियों का सहारा लेना पड़ रहा है। टैक्सी चालक इस स्थिति का फायदा उठाकर आम लोगों से मनमाना और कई गुना ज्यादा किराया वसूल रहे हैं, जिससे यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

रोडवेज के मंडलीय प्रबंधक सुरेश चौहान ने स्थिति पर स्पष्टीकरण दिया है। उनका कहना है कि सड़क पर बड़े वाहनों के फिसलने और फंसने के खतरे को देखते हुए बसों को रोका गया है। जैसे ही मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होगा, गुरुवार से टेंपो ट्रैवलर चलाकर सेवा शुरू की जाएगी।

आपदा के बढ़ते खतरों को देखते हुए प्रशासनिक अमला भी अलर्ट मोड पर आ गया है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने सभी सरकारी विभागों को मानसून की पूरी अवधि के दौरान 24 घंटे सतर्क रहने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

देहरादून स्थित कोषालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान विनय रुहेला ने मानसून में संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखा। उन्होंने अफसरों को स्पष्ट हिदायत दी कि कोई भी अधिकारी अपना सीयूजी या पर्सनल फोन बंद नहीं रखेगा और सभी का फोन 24 घंटे ऑन रहना चाहिए।

उपाध्यक्ष ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों का माइक्रो प्लान तैयार कर तुरंत कंट्रोल रूम सक्रिय करें। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी, एनएच और जल संस्थान को संवेदनहीन और भूस्खलन वाले नालों की सफाई, सड़कों से मलबा हटाने, पेयजल और बिजली सप्लाई सुचारू रखने के आदेश दिए गए हैं।

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