देहरादून, 19 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Uttarakhand Weather Alert : उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश लगातार जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य में 23 जुलाई 2026 तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बारिश के साथ कई जगहों पर तेज आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौसम के बिगड़ते हालात का कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने मुख्य सचिव आनंद बर्धन को राज्यभर की स्थिति पर सीधी नजर रखने को कहा है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को भी तत्काल प्रभाव से राहत कार्यों की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आपात स्थिति में कोई भी विभाग लापरवाही नहीं करेगा।
भारी बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन हो रहा है और सड़कें बंद हो गई हैं। सीएम धामी ने आदेश दिए हैं कि भूस्खलन से बाधित सड़कों को खोलने का काम युद्धस्तर पर हो। पेयजल, बिजली और संचार नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं की बहाली हर हाल में सबसे पहले की जानी चाहिए। प्रशासन को किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव टीमों को पूरी तरह तैयार रखने को कहा गया है।
चारधाम यात्रा मार्गों और सभी मुख्य राजमार्गों की लगातार निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय निवासियों, यात्रियों और बाहर से आए पर्यटकों से खराब मौसम में गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है। उफान पर बह रही नदियों और बरसाती नालों के किनारे जाने पर रोक लगा दी गई है। लोगों को मौसम विभाग की एडवाइजरी का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान 19 और 20 जुलाई 2026 के लिए बेहद गंभीर है। इन दो दिनों में देहरादून, नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। टिहरी, उत्तरकाशी, हरिद्वार, पौड़ी और बागेश्वर जिलों में भी आसमानी बिजली गिरने और भारी बारिश की प्रबल संभावना जताई गई है।
21 जुलाई 2026 को देहरादून और बागेश्वर में भारी बारिश का खतरा बना रहेगा। 22 और 23 जुलाई को मौसम का मिजाज उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली में बिगड़ा रहेगा। पिथौरागढ़ और बागेश्वर के ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में इन दिनों तेज बारिश का सिलसिला थमने वाला नहीं है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर खराब मौसम सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। पहाड़ियों से लगातार बड़े पत्थर और बोल्डर टूटकर रास्ते पर गिर रहे हैं। रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि पत्थर गिरने से कुछ जगहों पर रास्ता बार-बार बाधित हो रहा है। मशीनें और राहत टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर मलबा साफ कर रही हैं।
गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ धाम तक चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल मुस्तैद हैं। चिरबासा, भीमबली, लिनचोली और बड़ी लिनचोली जैसे सबसे संवेदनशील डेंजर जोन में जवानों को तैनात किया गया है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, वाईएमएफ और न्यू टास्क फोर्स की टीमें चौबीसों घंटे यात्रियों की सुरक्षा में लगी हैं।
जिला प्रशासन ने केदारनाथ मार्ग पर यात्रियों की आवाजाही को लेकर नया नियम लागू किया है। वर्तमान में पैदल यात्रियों के लिए दोहरे आवागमन की अनुमति दे दी गई है। सुरक्षित माहौल को देखते हुए श्रद्धालु अब दोनों तरफ से आ और जा सकते हैं।
घोड़ा-खच्चरों के संचालन को लेकर प्रशासन ने कड़ा फैसला लिया है। इनके लिए मार्ग पर केवल एकतरफा व्यवस्था लागू रहेगी। संकरे रास्तों पर लगने वाले जाम को खत्म करने और घोड़े-खच्चरों की भीड़ से यात्रियों को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।









