देहरादून, 31 मई (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में मौसम ने अचानक करवट ली है। राजधानी देहरादून में हुई झमाझम बारिश ने मई महीने के 86 साल पुराने रिकॉर्ड की याद दिला दी है। बीते 24 घंटे में शहर में 69 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो 1940 के बाद मई में एक दिन में हुई सबसे ज्यादा बारिश है। इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने पहाड़ी जिलों के लिए अगले 24 घंटे का अलर्ट जारी किया है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आने वाले एक सप्ताह तक पर्वतीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। रविवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने का अनुमान है। 3800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है।
मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो देहरादून में मई के महीने में इतनी बारिश दुर्लभ मानी जाती है। इससे पहले 28 मई 1940 को एक दिन में 79 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद शनिवार को दर्ज हुई 69 मिमी बारिश मई महीने में एक दिन की दूसरी सबसे अधिक बारिश है। इस बारिश के चलते अधिकतम तापमान लुढ़ककर 33.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
देहरादून और मसूरी में दिखा असर
शनिवार दोपहर करीब तीन बजे देहरादून और मसूरी में अचानक काले बादल छा गए। तेज अंधड़ के साथ शुरू हुई बारिश ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। राजपुर रोड पर आंधी के कारण एक पेड़ गिर गया, जबकि धूल भरी आंधी के चलते व्यापारियों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ीं। वहीं, पर्यटन नगरी मसूरी में दोपहर बाद मौसम सर्द हो गया। तेज बारिश और अंधड़ के कारण मालरोड पर घूम रहे पर्यटकों को वापस होटलों का रुख करना पड़ा।
पहली ही बारिश में ढही एमडीडीए की दीवार
बारिश और अंधड़ से शहर में नुकसान की खबरें भी सामने आई हैं। दून विहार वार्ड की भागीरथीपुरम कॉलोनी में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा लगभग 99.30 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे पार्क की सुरक्षा दीवार पहली ही बारिश में भरभराकर ढह गई।
मलबे की चपेट में आने से पास खड़े कई दोपहिया और लोडिंग वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। इसके अलावा जाखन-जोहड़ी रोड पर भी एक विशाल पेड़ गिरने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई। स्थानीय पार्षद ने वन विभाग को सूचित कर पेड़ हटाने और यातायात बहाल करने की मांग की है।









